सरकार जनता की बात मान लो, करा लो सी बी आई जाँच
1 min readऋषिकेश, उत्तराखण्ड शान्त प्रदेश में एक के वाद एक मामला जो सरकार के लिये नुकसान दायक सिद्द हो रहा है और तमाम जन पहाड़ से लेकर मैदान तक सड़को पर लामबन्द हो गए है।लेकिन सरकार है कि तमाम मामलों को ठंडे बस्ते में डालकर स्वयं के लिये मुसीबत बनी है। उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भण्डारी की हत्या सम्बन्धी मामला फिर से वी आई पी का नाम सामने आने से समूचे पहाड़ पर भूचाल आ गया है ओर इस मामले में सरकार घिरती नजर आ रही है।जनता अब इस प्रकरण पर सी बी आई जाँच चाहती है और दोषियों को फाँसी की सजा दिलवाने की मांग कर रही है।इस प्रकरण में सरकार को जनभावनाओं का सम्मान कर सी बी आई जाँच का आदेश देकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही कर एक नजीर प्रस्तुत करनी चाहिए।इस मामले से सरकार जितना पल्ला झाड़ेगी उतना ही नुकसान भाजपा को होना है।पहाड़ में इस भयानक सर्दी में भी गर्मी का एहसास दिखने को मिल रहा है।
ऋषिकेश नगर निगम मेयर चुनाव में पहाड़ को दरकिनार कर भाजपा ने बिहार रहवासी शम्भू पासवान पर दांव खेला ओर वो भारी विरोध के बाबजूद भी सरकारी मशीनरी के बल पर चुनाव जीत गए लेकिन जनता इस बात से बहुत आहत होकर इसको विश्वासघात समझ बैठी है।इसके अलावा नगर मुनि की रेती में खारास्रोत शराब ठेका जो कुम्भ मेला क्षेत्र सहित धार्मिक आस्था, वन भूमि पर निर्मित नगर पालिका पार्किंग पर अवैध तरीके से संचालित है उसका पिछले 65 दिनों से जबरदस्त विरोध किया जा रहा है ।इस मामले में सरकार मौन बनी है इसके अलावा अभी हाल ही में ऋषिकेश वन विभाग की भूमि और अवैध कब्जा करने वालो पर जब कार्यवाही की बात सामने आई तो नगर की जनता का भारी विरोध सड़कों आ गया और सरकार इस मामले में भी फिसड्डी साबित होकर इस कार्यवाही को सुप्रीमकोर्ट की दखल बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है।इस मामले में कार्यवाही के नाम पर कुछ लोगो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है जिससे इस मामले में अब जनता लामबन्द होकर सरकारके विरोध का मन बना चुकी है। सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई है 11 जनवरी को उत्तराखण्ड बंद का आयोजन किया गया है।सरकार के खिलाफ काँग्रेस, सपा, बसपा, सी पी आई, सी पी एम, उक्रांद, स्वाभिमानी मंच सहित तमाम घटक दल विरोध प्रदर्शन के लिये सड़को पर आ गए है।सरकार पर आरोपो का लगातार बौछार होना उचित नही है।जनता की सरकार सबका साथ सबका विश्वास और सबका विकास के नाम पर कार्य कर रही है तो फिर जब सब सही है तो बिना दबाब, रोकटोक के जनता की माँग को मानलेना ही निर्णायक होगा जिससे कोई भी रसूखदार बचने ना पाए।हर हाल में दोषी को दण्ड मिले।प्रतिबन्धित क्षेत्र कुम्भनगरी में शराब और नशे का व्यापार बंद हो तो सरकार पीछे क्यों?? पहाड़ पर पहाड़ के लोगो को फायदा मिले इसमें किसी को भी बुराई नही दिखनी चाहिये। पहाड़ में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप होना गम्भीर चिंता का विषय जरूर है जिसमे सभी को चाहिए कि लगाम लगाई और इनके बयानों को तूल ना दे।लेकिन आजकल यही सब दिख रहा है।उर्मिला सनावर, उन्नाव केस पीड़िता सहित बहुत से नाम सामने आ रहे है जो देवभूमि का अपमान करने में तुले है।

