उत्तराखण्ड भाजपा में परिवर्तन की सुगबुगाहट ज्यादा,कई चेहरे बदले जाने की चर्चा ज्यादा।मकर सक्रांति भाजपा के लिये मुसीबत लेकर आया।
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उत्तराखण्ड, भारतीय जनता पार्टी की सरकार और प्रदेश संगठन के लिये एक के बाद एक जनता, कर्मचारी ,राजनीतिक ओर सामाजिक संस्थाओं का भारी विरोध के बाबजूद सरकार और संगठन जनता के निशाने पर है।सम्पूर्ण प्रदेश में अंकिता भण्डारी की निर्मम हत्या और फिर उसके परिवार को न्याय ना मिलना, प्रदेश में नशे का कारोबार राजस्व के नाम पर बिक्री मद्यनिषेध होने के बाबजूद, पलायन , रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और कर्मचारियों का हो रहा उत्पीड़न आदि का जनता विरोध कर रही है।अभी हाल ही में ऋषिकेश महानगर में वन विभाग के माध्यम से वर्षों से काबिज लोगो के खिलाफ कार्यवाही करना सरकार के लिये मुसीबत बन गया और सरकार को भारी विरोध झेलना पड़ रहा है।इन तमाम हालातो के चलते भाजपा नेताओं के अनर्गल बयानो ने तूफान खड़ा कर दिया है।जगह जगह भाजपा का प्रबल विरोध,पुतला दहन का कार्यक्रम भाजपा में खलबली मचाने वाला साबित हो रहा है जिसकी सूचना राष्ट्रीय संगठन तक पहुंच चुकी है और इस बात से राष्ट्रीय भाजपा कुनवा नाखुश नजर आ रहा है।
सूत्रों से प्राप्त सूचना के आधार पर प्रदेश के सांगठनिक ओर सरकार के कुछ कदावर मंत्रियों के बदले जाने की चर्चा है।इस बात में कितना दम है ये इस बात से लगाया जा सकता है कि जब हारे व्यक्ति को प्रदेश में मुख्यमंत्री ओर प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर मिल सकती है साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा नवीन बिहार से बनाये जा सकते है तो फिर उत्तराखण्ड में युवाओं को भाजपा राष्ट्रीय संगठन तरजीह दे सकता है और जो जनता का भारी विरोध भाजपा को झेलना पड़ रहा है उसमें कमी आएगी और भाजपा के प्रति फिर वही विश्वास जनता में बन पाए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की चर्चा बहुत अधिक है और जो मंत्री, विधायक सरकार के लिए किरकरी बने है उन पर नए चेहरों पर दांव भाजपा खेल सकती है लेकिन भाजपा अपने पुराने लोगों को भी नाराज ना कर उन्हें कोई अन्य जिम्मेदारी दे सकती है। भाजपा का मिशन हर हाल में 2027 में भाजपा को प्रदेश में व्यापक जनसमर्थन दिलाना ओर सरकार बनाना है इसलिये देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा जनता के असंतोष को किस प्रकार दूर कर नई रणनीति अख्तियार करती है ।

