February 22, 2026

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मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पशुपालकों को मिला स्थायी बाजार, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम*

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*संस्थागत बाजार से जुड़ा स्थानीय उत्पादन, पौड़ी में सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था*

 

*स्थानीय संसाधन, स्थानीय रोजगार: पशुपालकों के लिए नयी व्यवस्था*

 

*सूचना/पौड़ी/21 दिसंबर,2025:*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस और परिणामोन्मुख कदम उठा रही है। स्थानीय युवाओं, पशुपालकों और मत्स्य पालकों को स्वरोजगार से जोड़ने की इसी नीति के तहत जनपद पौड़ी गढ़वाल में एक नयी और प्रभावशाली पहल को मूर्त रूप दिया गया है।

 

पशुपालन विभाग द्वारा स्थानीय उत्पादों के लिए संस्थागत स्तर पर सुनिश्चित बाजार व्यवस्था विकसित की गयी है। इस क्रम में मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा एवं सशस्त्र सीमा बल के केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र, श्रीनगर गढ़वाल के उप महानिदेशक के मध्य एक महत्वपूर्ण सहमति ज्ञापन संपन्न हुआ है।

 

इस समझौते के अंतर्गत अब एसएसबी के केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र को भेड़, बकरी, पोल्ट्री (ब्रॉयलर) एवं अन्य मांस उत्पादों की नियमित, ताजा और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति स्थानीय पशुपालकों द्वारा की जाएगी। साथ ही जनपदीय मत्स्य प्रभारी द्वारा मछली आपूर्ति हेतु पृथक अनुबंध किया गया है, जिससे मत्स्य पालकों को भी इस अभिनव व्यवस्था से सीधे तौर पर जोड़ा गया है।

 

यह पहल स्थानीय उत्पादकों के लिए केवल बाजार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थायी आय, मूल्य सुरक्षा और रोजगार सृजन का मजबूत आधार तैयार करती है। बिचौलियों की भूमिका सीमित होने से उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

 

स्थानीय स्तर पर उत्पादन एवं उपभोग की इस व्यवस्था से परिवहन लागत में कमी आएगी, पर्यावरणीय प्रभाव घटेगा तथा क्षेत्रीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान और वाइब्रेंट विलेज योजना की भावना के अनुरूप एक प्रभावी मॉडल बताया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस सहयोग को और विस्तार दिया जाएगा, ताकि अन्य स्थानीय उत्पादों को भी इस प्रणाली से जोड़ा जा सके। यह पहल सुरक्षा बलों की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ नागरिक तंत्र और स्थानीय उत्पादकों के बीच सहयोग का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।

 

यह अभिनव प्रयास न केवल ग्रामीण आजीविका को नया आधार देगा, बल्कि जनपद पौड़ी गढ़वाल को स्थानीय उत्पादन आधारित आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाएगा।

 

 

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