डॉ निधि उनियाल के मामले ने व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया ?
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देहरादून ;डॉ निधि उनियाल का मामला शासन- प्रशासन पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है? हमारी इस व्यवस्था पर जिस. पर सभी की मौन स्वीकृति है ? मामला सुर्खियों में आए तो जांच ?ना आए तो ऐसा ही चलता रहेगा? लेकिन डॉ निधि उनियाल ने सम्मान से ज्यादा अपनी नौकरी को तवज्जो ना देकर एक उदाहरण पेश किया कि चाटुकारिता से अच्छा सम्मान से अपना अपना कार्य करना है व सम्मान के आगे कुछ नहीं ,पर शर्म ऐसे लोगों को आनी चाहिए जो उच्च पद पर बैठकर घटिया मानसिकता का परिचय दे रहे है , यह सवाल उन अधिकारियों पर भी है, जिन्होंने डॉक्टर निधि उनियाल को ओपीडी छोड़कर किसी के घर जाकर देखने को मजबूर किया उन पर भी प्रश्न चिन्ह है ?प्रदेश के मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तबादला आदेश रद्द किया वह जांच के आदेश दिए ,पर जांच सही दिशा में जाए यह देखना भी जरूरी है lसवाल व्यवस्था पर है और व्यवस्थापको पर हैं
आखिर कब तक वीआईपी कल्चर जीवित रहेगा और वह आम आदमी जिसका कोई सुनने समझने वाला कोई नहीं तो वह क्या व्यवस्था में अपने आप को अनाथ महसूस करता रहेगा या इस तरह की व्यवस्था में कुछ सुधार आएगा l
