5 दिन, वीरान 40 जिन्दगी, सवालों के घेरे में सरकार
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सिलक्यारा उत्तरकाशी टनल हादसे के 5 दिन बाद भी 40 जिन्दगी अपने को सुरक्षित बाहर निकलने की गुहार कर रहे है वही उनके परिवारिक जन उन्हें सकुशल सलामती के लिये बहुत चिन्तित बने स्वयं को बेसहारा मान रहे है।हादसे के बाद जरूर शासन प्रशासन जागा है वही दूसरी ऒर सियासत का खेल भी बदसूरत जारी है।5 दिन का लम्बा दौर पूरा आपदा ओर शासन प्रशासन की टीम ग्रुप 1, 2 ओर तीन के अनुरूप कार्य कर प्राथमिकता के साथ फंसे समस्त मजदूरों की सकुशल टनल से बाहर सुरकक्षित निकलना चाहती है परन्तु सरकार के प्रयास अभी विफल कारगर सिध्द नही हुए है जिससे यँहा का माहौल दुःखी इर डरा डरा हुआ है।
इस हादसे की जड़ और कमियों को बाद में देखना ओर समझना भविष्य के लिए जरूरी है किंतु अभी उन तमाम जिंदगियों को सुरक्षित उनके परिवारिक जनों को सौपना सरकार के लिए जरूरी कदम है।इस सम्बंध में केन्द्र की मोदी सरकार, प्रदेश की धामी सरकार हर सम्भव युध्द स्तर पर अनेक प्रकार की इंजीनियरिंग सलाह से कार्य कर नार्वे, थाईलेण्ड, अमेरिका आदि से मदद लेकर कार्य जारी रखे है कि किसी भी सूरत में जोखिम में पड़ी जिंदगियों को बाहर निकाला जाए इसके लिए विदेशी मशीनों को उनकी तकनीकी का सहारा लिया जा रहा है।ईधर दूसरी ओर 5 दिन से कोई कामयाबी हासिल ना होने से जनमानस में चिंता बढ़ी है वही कुछ लोग सियासत कर माहौल को बिगाड़ने का कार्य कर रहे है।सवाल ये भी जरूरी है की जब घटना घटित हो गयी है और टनल में मजदूर फंसे है तो फिर जरूरी उनको बचाने को प्रयास होना चाहिए ना कि कमियों को उजागर कर मनगढ़ंत कहानी बनाई जावे।कार्यदायी संस्था ओर सरकार से बाद में पूरे तथ्यों के साथ सवाल जवाब ओर कमियों से रूबरू हुआ जा सकता है।आप प्रदेश की सियासत करते है तो पूर्व में भी आपको इस दिशा में पहल कर जनता और सरकार सहित कार्यदायी संस्था को बताना चाहिए था ताकि आज उन्हें जनता की अदालत में जबाब देने को बाध्य होना पड़ता।
अब ऐसे समय मे जंहा 40 मजदूर फंसे हुए हो और उनके ओर उनके परिवारिक जन उन्हें पाने के लिए बेताब हो तो सभी लोगों की दुआएं से ओर देवभूमि के ईश्वरीय अनुकम्पा से इस दिशा में तत्काल सहायता मिले।ये दौर एक दूसरे को नीचा दिखाने का नही बल्कि पूरक बनकर क्या नया कर तमाम फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
