नीलम बिजल्वाण पहुंची अंकिता भंडारी के घर, आर्थिक सहायता भी दी l
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प्रथम पुण्यतिथि पर अंकिता भंडारी के घर यदि कोई पहुंचा तो वह पहुंची नीलम बिजल्वाण, उसके गांव पहुंचकर उसके पिता को कुछ आर्थिक सहायता देकर ,हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया l
कहते हैं जब आपको किसी मदद करने , सहायता करने करने की प्रबल इच्छा हो , भाव निस्वार्थ हो तो आपका वह काम सफल हो ही जाता है ,और यही निस्वार्थ भाव से नीलम बिजल्वाण व हिमांशु बिजल्वाण अंकिता भंडारी के घर पहुंचे थे ताकि उसके परिवार की मदद कर सके और वे अपने प्रयास में सफल हो गए , सफर में चलते-चलते तो यह पता चला कि उनके घर में कोई नहीं है,अंकिता भंडारी की माताजी देहरादून व पिता श्रीनगर गए हुए हैं, किंतु एक कहावत है कि जहां चाह जब राह यानि ठान लिया था की प्रथम पुण्यतिथि पर उसके घर पर पहुंचकर उसे श्रद्धांजलि दी जाए तो यह नामुमकिन काम भी मुमकिन हो गया
अंकिता भंडारी के पिता और 85 वर्षीय’ अंकिता भंडारी की दादी से भी मुलाकात हुई पर ऐसा लगा कि परिवार में कुछ सुना सुना सा है खुशियां जैसे अंकिता से शुरू हुई हूं और उसकी जाने के बाद खत्म हो गई पर नियति का खेल है की दुखी होकर भी जीना होगा हंस कर भी जीना होगा
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में एक छोटा सा गांव बरसूडी है जहां अंकिता का परिवार निवास करता है अंकिता भंडारी के गांव में कदम रखते ही यह महसूस हुआ की किन परिस्थिति में अंकिता भंडारी ने अपनी पढ़ाई लिखाई की होगी और किस परिस्थिति के कारण से नौकरी पर जाना पड़ा जो हमें महसूस हुआ lअंकिता भंडारी के पिता से की गई चर्चा में यह महसूस हुआ के पिता द्वारा अपने बच्चों पढ़ाई लिखाई को लेकर काफी सजग थे और अपने अथक प्रयासों के द्वारा उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाई लिखाई में किसी भी तरह की कमी आने दी उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को लेकर अपने द्वारा किए गए प्रयासों के लिए चर्चा की अंकिता और उसका भाई दोनों पढ़ने में उच्च श्रेणी के थे किंतु नियत को कुछ और ही मंजूर था अंकिता असमय चली गई और उसका भाई अभी दिल्ली में रहकर अपनी का की पढ़ाई कर रहा है
अंकित हत्याकांड में पूरे उत्तराखंड को हिला दिया हमें अंकिता के घर जाकर महसूस हुआ कि एक छोटे से गांव में रहने वाली अंकिता भंडारी जिसमें शायद अपने जीवन में बहुत बड़े-बड़े शहर के सपने ना देखें, लेकिन पढ़ाई लिखाई में बात वह अपने जीवन को किसी मुकाम में पहुंचाना चाहती थी, वह हमें उसके पिता से हुई बातचीत से महसूस हुआ किंतु ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था अंकिता मैं इस दुनिया से तो अलविदा ले ली किंतु अपने परिवार को जिन्हें आज तक कोई जानता ना था उन्हें मुकाम दिला गई पर अपने आप घोर निद्रा में सो गई l
अंकिता भंडारी को न्याय मिले उसके कातिलों को सख्त से सख्त सजा मिले यही उसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी
