February 17, 2026

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राज्य की मूल धारणाओं से दूर सियासती आईना

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राज्य स्थापना दिवस पर विशेष रिपोर्ट – संजय बड़ोला

राज्य स्थापना दिवस 9 नवम्बर को वर्तमान राज्य सरकार और जिला प्रशासन भव्य रूप से आयोजित करने जा रहा गया ओर ऐसे मौके पर भारत राष्ट्र की सर्वोपरी महामहिम राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू देहरादून राजधानी में प्रवास पर होकर इस कार्यक्रम में शामिल होंगी तो इसका असर राज्य में जरुर देखने को मिल सकता है।जो सपना राज्य आंदोलनकारी शहीदों ओर राज्य आन्दोलन कारियो ने देखा है उसको अवश्य धरातल पर स्थान मिलेगा यही सच्ची ओर शहीदों को श्रद्दांज्जली होगी।

देवभूमि उत्तराखंड  के गौरव ओर विकास का समागम रोजगार, पलायन ओर मूल भूत समस्याओ का हल निकलते हुए जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा कर स्थानीय लोगो का जीवन सुरक्षित करने का कार्य करेंगे।जिनसे अभी तक जनता वँचित दिख रही है।
9 नवम्बरव2000 को इस नए प्रदेश का निर्माण स्थापना स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री भारत सरकार ने खुद देहरादून में की है किन्तु सच का आईना जो तस्वीर इस छोटे राज्य की दिखाता है वो किसी भी सूरत में अच्छी नही है बल्कि भयभीत करने वाली है इससे राज्य आंदोलनकारी भी नाखुश है।अभी तक प्रदेश ने राज्य की लड़ाई लड़ने वाले कर्मठ लोगों को चिन्हित ना कर अपने अपने लोगों को चिन्हित करने का दुःसाहस किया है इसमें कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य दल भी शामिल रहे है जबकि बहुत से समर्पित जन जो अब इस दुनिया में भी नही रहे है उनके निर्देशन में ये लड़ाई लड़ी गई उन्हें सम्मान ना मिलना इस प्रदेश की सियासत में बैठे लोग सीधे सीधे जिम्मेदार है। सरकार सभी को जोड़ने का कार्य तो नही कर पाई किन्तु आपस मे बांटने का कार्य बखूबी ढंग से करने में आमादा रही है।
आज उत्तराखण्ड 23 वर्ष पूर्ण कर 24 वर्ष में प्रदार्पण कर रहा है13 जिलों का छोटा प्रदेश परन्तु समस्याओं से जूझता गांव, नगर, जिला आज भी तरक्की की राह ढूंढ रहे व्याकुल है परंतु इसके बदले राज्य की 24 वर्ष में 10 मुख्यमंत्री, सैकड़ो मंत्री, राज्य मन्त्रियों समेत भारी अफसरशाही का अधिभार प्राप्त हुआ है जिनके पास प्रदेश के विकास और विजन का अभाव निरन्तर चर्चा का विषय जनमानस पर रहा है। कुल मिलाकर जो विकास की किरण प्रदेश की जनता को दिखनी चाहिए उसका अभाव यँहा पलायन, रोजगार, शिक्षा और चिकित्सा में स्पष्ट देखा और समझा जा सकता है।सूर्य अस्त, गढ़वाल मस्त की कहावत बहुत सुनी किन्तु आज प्रदेश की नई सियासत में सवार जन खुद शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए लालायित दिखते नजर आ रहे हैं ।
उत्तराखण्ड प्रदेश में आपदा, रिश्वत खोरी,भ्रष्टाचार, नकल, भाई भतीजावाद जैसे नए वाक्या सामने आ रहे है जो इस प्रदेश के लिए सही तस्वीर नही है।प्रदेश को संवारने के असली कार्य अब जनता को स्वयं करना है तो समय से तमाम पहलुओं पर सोच विचार कर नया अध्याय लिखना है। आज ,कल ओर भविष्य को नजर रखते हुए अपने गौरवशाली इतिहास, पहचान और संस्कृति के मर्यादा अनुसार राज्य की अवधारणा को सरंक्षित करना आप ओर मेरा संकल्प होना चाहिए।

राज्य के लिए समर्पित शहीदों ओर राज्य आंदोलनकारियों की सँघर्ष की कहानी व्यर्थ ना जाने पाये।बस उम्मीद है कि हम उनके देखे सपनो का उत्तराखण्ड बनाये जो देश की नजीर बने। इस पावन दिवस पर समस्त पहाड़वासियों को शुभकामनाये ओर बधाई माँ गंगा नेटवर्क टीम की ओर से।

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