महाशिवरात्रि पर्व पर दिव्य एवं आध्यात्मिक उत्सव,अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और साधना के वातावरण में संपन्न हुआ
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महाशिवरात्रि महोत्सव – 15 फरवरी 2026
परम पूज्य अवधूत श्री स्वामी समर्पणानंद सरस्वती महाराज के पावन सान्निध्य में 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का दिव्य एवं आध्यात्मिक उत्सव विश्वभर से आए भक्तों के साथ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और साधना के वातावरण में संपन्न हुआ
इस पावन अवसर पर स्पेन से अल्बर्टिना, अर्जेंटीना से मरियाना, फ्रांस से चेस्टेल, भारत से योगिनी अनामिका, नेपाल से हरिश सहित अनेक देशों के साधक-भक्त उपस्थित रहे। इस महोत्सव में सुप्रसिद्ध वैदिक आचार्य पंडित मनीष कोठारी ने भी अवधूतजी के साथ मिलकर विशेष वैदिक-तांत्रिक शिवपूजन एवं अनुष्ठान संपन्न कराया।
महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव की उपासना, आत्मचिंतन, उपवास, जप, ध्यान और रात्रि-जागरण के माध्यम से अज्ञान और अंधकार पर विजय का संदेश देता है। यह पावन रात्रि भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह तथा शिव के तांडव नृत्य की स्मृति से भी जुड़ी मानी जाती है। भक्त “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप, शिव पूजन, ध्यान तथा सत्य, अहिंसा, क्षमा, करुणा और दान जैसे दिव्य गुणों के पालन का संकल्प लेते हैं।
इस वर्ष के आयोजन में रात्रि-जागरण, वैदिक एवं तांत्रिक शिवपूजन, ध्यान-साधना, भजन-कीर्तन तथा आध्यात्मिक प्रवचन के विशेष कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम में श्रीविद्या, तंत्र एवं योग परंपरा की दिव्य धारा के अंतर्गत भैरव-भैरवी तत्त्व, 64 योगिनियों की आध्यात्मिक शक्ति तथा साधक के आंतरिक रूपांतरण पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। स्वामी समर्पणानंद सरस्वतीजी ने अपने संदेश में कहा कि सच्ची साधना केवल व्यक्तिगत मुक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि मानवता की सेवा, आत्मशुद्धि और ईश्वर-अनुभूति की ओर ले जाने वाली दिव्य प्रक्रिया है, जो विश्व में शांति, करुणा और आध्यात्मिक जागरण का संचार करती है।
समारोह का समापन विश्वशांति, मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरण की सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ।
