नियम को ताक में रखकर हो रहे हैं होटल के पंजीकरण, दलाल बटोर रहे 1 से 2 लाख रुपए ?
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भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस वाली सरकार क्या सही मायने में भ्रष्टाचार पर वार करेंगी ऐसा लगता नहीं है इसका एक उदाहरण आप सबके सामने सरकार की नाक के नीचे भर्ती परीक्षाओं का खेल खेला गया जो कि युवा बेरोजगारों के साथ एक बहुत बड़ा अन्याय था l
अंकिता हत्याकांड के बाद जहां होटल गेस्ट हाउस व कैंप कि लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, की मानकों के अनुरूप चल रहे हैं या मानकों के विपरीत चल रहे हैं l
इन तमाम होटलों के संचालक आजकल इसलिए परेशान हैं की मानकों के अनुसार उनका पंजीयन होना मुश्किल है? किंतु यह भी उतना ही सच है एक से दो लाख रुपए खर्च करने पर पंजीकरण हो जाएगा l जब होटल व कैंप नियम व मानकों के अनुसार तथा एनजीटी की गाइडलाइंस के अनुसार सही संचालित नहीं हो रहे है ,तो इनका पंजीकरण कैसे किया जा सकता है ,? तो दूसरी तरफ होटल संचालकों का कहना है कि मानक व नियम के अनुसार न पर्यटन विभाग में पंजीकरण होना संभव नहीं हैस ,किंतु नियम के विपरीत दलालों के माध्यम से एक से दो लाख खर्च करने पर यह संभव है, ऐसा कैसे हो सकता है बड़ा सवाल?
होटल संचालकों का कहना है कि मानकोऔर नियमों की अनदेखी कर स्वर्ग आश्रम क्षेत्र में कई होटलों का पंजीकरण हो चुका है यह कहां तक सच है विभागीय बताएगा ,किंतु जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार लाखों रुपए खर्च करके नियम और मानक को ताक में रखकर कार्य हो रहा है l
