November 2, 2026

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एच 0एन0 बी0 जी0 यूं0 के होनहार शोधार्थी अंशुल गैरोला को मिला ‘युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’, 21वें USSTC-2026 में उत्तराखंड का बढ़ाया मान

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श्रीनगर (गढ़वाल):

उत्तराखंड के उच्च शिक्षा जगत और शोध के क्षेत्र से एक बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (HNBGU) के रसायन विज्ञान विभाग के पी.एच.डी. शोध स्कॉलर अंशुल गैरोला को उनकी उत्कृष्ट शोध प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित ‘युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’ (Young Scientist Award) से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि उन्हें उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के तत्वावधान में आयोजित 21वीं उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) के दौरान प्रदान की गई।

बायोटैक्नोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी सत्र में बिखेरा जलवा

इस प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय सम्मेलन में प्रदेशभर से आए युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। अंशुल गैरोला ने ‘बायोटैक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी’ (Biotechnology, Biochemistry, and Microbiology) विषय के अंतर्गत अपनी एक बेहद प्रभावी और उच्च स्तरीय पोस्टर प्रस्तुति (Poster Presentation) दी।

उनके शोध का विषय, विषय की गहराई और प्रस्तुतिकरण का तरीका इतना शानदार था कि मूल्यांकनकर्ताओं और वहां मौजूद वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उसकी खासी सराहना की। उनके इसी अकादमिक और वैज्ञानिक योगदान को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया।

शोध और नवाचार को मिला नया आयाम

अंशुल की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत शोध करियर के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग और बायोटैक्नोलॉजी से जुड़े अंतःविषय (Interdisciplinary) शोध की मजबूती को भी दर्शाती है। वर्तमान समय में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऐसे युवा शोधार्थियों का आगे आना उत्तराखंड के वैज्ञानिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

विश्वविद्यालय परिवार में जश्न का माहौल

अंशुल गैरोला की इस बड़ी उपलब्धि पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय रसायन विभाग के प्रोफेसरों, शोध निर्देशकों और उनके साथियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सभी ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी शोध कार्यों के लिए शुभकामनाएं दी हैं। शिक्षकों का कहना है कि अंशुल की यह सफलता अन्य शोधार्थियों को भी कड़े परिश्रम और समर्पण के साथ नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

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