October 2, 2026

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पेयजल जल संस्थान को जनता का विरोध नागवार लगा तो पीने के पानी से ही वंचित करने की साजिश

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मुनि की रेती, पेयजल संस्थान की हर घर नल, हर घर जल योजना जनता के लिए मुसीबत भरी साबित हो रही है।जल ही जीवन नही बल्कि जल उपलब्ध ना होना मुसीबत बनी है।विश्व बैंक की मदद से जनता को 24 घण्टे स्वच्छ, सुंदर जल उपलब्ध कराने का वादा बेमानी साबित हो रहा है।जबकि जल मिशन योजना का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास है और जनता से किया गया वादा वास्तविकता के धरातल पर दिखाई नही दे रहा है।परन्तु पीने का जल नही मिलने पर भी पानी के अनाप शनाप बिल हजारों रुपयों के प्रत्येक 2 माह में भुगतान हेतु मिल रहे है।जल संस्थान विभाग पूर्व में 200 रुपये प्रति माह के हिसाब से जल उपभोक्ताओं को 4 माह में बिल भुगतान के लिये भेजता आ रहा था और जनता को भी इसको देने में कोई ऐतराज नही किया गया।लेकिन पेयजल निगम के नाम पर ठेकेदारों के हवाले इस योजना के तहत जमकर लूट बाजारी ओर पीने का पानी उपलब्ध ना करना जनता के रोष का विषय है जिसके तहत कई बार क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों सहित नगर की पालिका अध्यक्ष के विरोध चेतावनी के बाद भी हालत जस के तस दिखाई दे रहे है ।
अभी हाल में पेयजल निगम की तमाम लचर व्यवस्था और अनाप शनाप बिल के सम्बंध में जनता, जनप्रतिनिधियों ने कार्यालय घेराव कर अपनी समस्याओं को पेयजल अधिकारियों को अवगत कराकर इसके त्वरित समाधान ओर पूर्व व्यवस्था के आधार पर घरों के पानी के बिल भुगतान हेतु उपलब्ध कराने की मांग की।सूत्रों जे हवाले से जानकारी मिली है कि जनप्रतिनिधियों की जनहित की मांग को नकारते हुई पीने के पानी की सप्लाई प्रभवित कर पितृ पक्ष में तर्पण, हवन आदि हेतु जल सेवा बाधित कर जल ही जीवन है को ठेंगा दिखाने का कार्य किया जा रहा है।माँ गङ्गा नेटवर्क ने इस समस्या के बारे में पूर्व ही जनता को सजग होने के इरादे से खबर प्रकाशित कर अपने दायित्व का निर्वहन किया।देर से सही जनता और जनप्रतिनिधियों ने इसका संज्ञान लेकर पेयजल निगम को जगाने ओर पीने के पानी सहित पूर्व की भांति जलकर बिल प्रेषित करने की जोरदार मांग की है।जनता का स्पष्ट कहना है कि ठेकेदारी संस्था द्वारा जारी ऑन लाइन बिल प्रकिया समाप्त कर विभागीय स्तर से मेनवली बिल के साथ घरों में उपलब्ध पानी के मीटर तुरन्त हटाये जाय। पानी की किल्लत एकदम होने से पेयजल निगम की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठने शुरू हो गए है जनता का विश्वास लगातार कम होने के कारण ये जनांदोलन का रूप लेकर उत्तराखण्ड के अन्य जनपदों में भी व्यापक रूप से सरकार के लिये मुसीबत बन सकता है।सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त है लेकिन ये जल जीवन मिशन की लापरवाही से पीड़ित जनता वर्तमान सरकार को विदाई देने का कार्य ना कर बैठे इसमें सरकार को जनहित में फैसला लिए जाने की जरूरत है।

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