सीधी दो टूक उक्रांद की बेहतरी के लिये जरूरी
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कल नरेंद्रनगर पालिका परिषद के चुनाव में नरेंद्रनगर के विधायक, मंत्री और वँहा के स्थानीय मतदाता सुबोध उनियाल का अचानक वार्ड नम्बर एक कुम्हार खेड़ा में जाना उक्रांद की प्रतिष्ठा और सुर्खियों में अपने को बचाये रखने का षड़यंत्र बनता दिख रहा है।अपनी कमियों को छुपाने ओर असफल होने पर उक्रांद केवल वार्ड नम्बर 1 से सभासद का चुनाव लड़ रही है और इसमें ही उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा जीत के लिये लगाई है। साफ बात है कि चुनाव मुद्दों, विकास और जनता से जुड़े होने पर ही लाभ अर्जित किया जा सकता है जिससे उक्रांद अभी कोषों दूर है।कभी उक्रांद के समर्पित स्वर्गीय इंद्रमणी बडोनी के दाहिने हाथ स्वर्गीय सुंदर लाल सिलस्वाल के योगदान को भी पलीता लगाया जा रहा है और युवा शक्ति के रूप में सरदार सिंह पुंडीर ही उक्रांद के लिये तन मन धन से समर्पित रहे है। आज शोशियल मीडिया में तरह तरह का आडम्बर रचकर सुर्खियों में तो रहा जा सकता है लेकिन सच्चाई कुछ और जो सेहत और पार्टी के लिए ठीक नही।जिसका उक्रांद शिकार रही है।
उक्रांद जितना व्यक्तिवाद ओर पाखंड को जन्म देकर अपना कुनवा बढ़ाने का कार्य कर रही है उस ऊर्जा को जनता से जुड़कर मुद्दों और धरातल पर आकर संघर्ष कर यथार्थ से जुड़ने का कार्य करे।सत्य तो ये है कि पौड़ी के आशुतोष नेगी अपने पुराने पत्रकार है और पार्टी के लिये समर्पित भाव से कार्य कर रहे है ।अंकिता भण्डारी हत्या का सबसे बड़ा आंदोलन उन्होंने जारी रखा पीड़ा सहन की ।लेकिन कभी कभी उनके बिगड़ैल बोल घातक साबित हुए है।आशीष नेगी अपनी ढपली अपना राग के आधार पर इंसान से कॉकरोच, दीमक बनने की मुहिम से जुड़े है। एकमात्र शान्ति प्रसाद भट्ट है जो जनहित में प्रयास करते है लेकिन उक्रांद गुटबाजी का शिकार बना है ।यही कारण है कि नरेंद्रनगर में इन्हें ना अध्यक्ष और ना सभासद के प्रत्याशी मिल पाए।फिर क्या होगा विरोध में कई पुतले भस्म कर दो परन्तु तुम तो पार्टी को नुकसान स्वयं पहुंचा रहे हो।अभी हाल ही में 14 बीघा रामलीला ग्राउंड में उक्रांद में काफी लोगो ने सदस्यता हासिल की जिसमे केंद्रीय अध्यक्ष सहित तमाम कदावर लोग शामिल हुये ।इससे जँहा पार्टी मजबूत होनी थी वही ऐसा अचानक क्या हुआ कि पार्टी में शामिल सदस्य त्यागपत्र देकर उक्रांद पर ही सवालिया निशान लगाते दिखे।युवा संदीप भण्डारी ने तो नरेंद्रनगर चुनाव में उक्रांद के कार्यकर्ताओं पर सीधे भाजपा के लिये कार्य करने का आरोप लगाया है।इस पर उक्रांद के लोग कुछ कहेंगे…।
अब कल जब चुनाव हो रहे थे तो चुनाव प्रक्रिया का पालन हर किसी के लिए जरूरी है।अब आरोप है कि चुनाव के दौरान स्थानीय विधायक की मौजूदगी उक्रांद की नेत्री को क्यो खली??क्या मंत्री ने चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया?? फर्जी मतदान कराया??सरकारी मशीनरी पर कोई दबाब बनाने की चेष्टा की??? इस सम्बंध में रिटर्निंग अफसर अथवा सैक्टर मजिस्ट्रेट से तत्काल शिकायत दर्ज क्यो नही कराई??क्या तुम वार्ड नम्बर 1 की मतदाता हो??अगर नही तो तुम किस हैसियत से वँहा मौजूद रही??? सोची समझी रणनीति के तहत तुमने बबंडर किया???सियासत में अपने को सुर्खियों में लाने का षड्यंत्र किया???आदि आदि अनगिनत सवाल है जो आज नही कल देने पड़ेंगे इसमें भाजपा भी शामिल है।
पार्टी से व्यापक आपसी सौहार्द है जो हमेशा जिंदा रहनी चाहिए लेकिन तुम्हारे लिये सत्ता पाने के लिये किसी भी स्तर पर गिर जाओ उचित नही है । अब सवाल ये है कि जब तुमने कल 5 बजकर 14 मिनट पर वार्ड नम्बर 1 की सभासद बेटी के नाम का दुरुपयोग किया है तो फिर भरोषा जाँच पर होना चाहिये ।उक्रांद है इसको जांच पर भरोषा नही है और आज 14 बीघा रामलीला ग्राउंड के पास पुतला ओर विरोध की सियासत की जा रही है।इससे उक्रांद का बढ़ता ग्राफ प्रभावित होगा जनता का विश्वास कम और आडम्बर ज्यादा लगेगा। मंत्री दोषी होगा तो चुनाव आयोग कार्यवाही करेगा, इस प्रकरण को जनता देख रही है।ये भी सत्य है कि मंत्री सुबोध उनियाल विपक्षियों के रडार पर अक्सर रहते है।उनकी एक बयान को विपक्ष मुद्दा बनाकर उन्हें कटघरे में लाने का अवसर ढूंढता है परन्तु सफलता नही मिलती है।उक्रांद जनता पर भरोषा रखे सबकी कुण्डली जनता के पास है और जनता रिजल्ट भी दे रही है तो विपक्ष को भी इसको मानना चाहिए। मोहत्तरमा का बबंडर करना उनकी हताशा ओर निराशा को दर्शाता है।लड़ाई लड़नी है तो मुद्दों पर लड़े, व्यक्तिवाद पर नही…विन्रमता का होना आवश्यक है।
