जनता और विपक्ष की नब्ज टटोलने के माहिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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(भारत भूषण कुकरेती)
ये वाक्यांश यूं ही नही बल्कि इनमें गहराई की छाप है और इसको देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी लगातार भुनाकर 11 वर्षों से अधिक केंद्र और कई राज्यो की डबल इंजन सरकार की भूमिका निभा रहे है।फुट डालो राज करो अंग्रेज ओर काँग्रेस की प्रवर्त्ति रही है लेकिन जनता की नब्ज को इमोशनल ओर विपक्ष की कमजोरी को पकड़कर सत्ता के गलियारे में शुमार मोदी का राजयोग कमियों को भी अवसर में बदल देता है।समूचा विपक्ष मोदी के खिलाफ लामबंद दिखता ओर हर पल विरोधी रुख अपनाते हुये उन्हें जनता के जनादेश से दूर करने का यत्न करते है वही मोदी विपक्ष की कमजोरी का फायदा उठा कर दुगने उत्साह के साथ केंद्र और राज्यो में अपनी सरकार बनाने में फतह हासिल कर समूचे विपक्ष के लिये मुसीबतों का पहाड़ खड़ा किये है।
ये कारनामा सिर्फ मोदी ही नही बल्कि जनता का रुख भाँपकर सदी के महानायक अभिताभ बच्चन भी प्रयोग कर सफलता के शिखर पर सवार है।उन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर जिस संघर्ष और जनता की कमजोर वर्ग को साधने ओर उनके जैसा अभिनय कर ये मुकाम पाया है।गरीब, किसान, मजदूर, मवाली आदि आदि का रोल कर उन्होंने ये ख्याति पर 5 दशको से अधिक राज किया है। ऐसा ही वॉलीवुड में जो लोग शहंशाह ओर शिखर पर रहे उन्होंने जनता को समझते हुये उनकी कमजोरी,चाहत को परदे में उकेरने का कार्य किया । भारतीय राजनीति में वर्तमान दौर में 11 वर्षों से नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार सत्ता पर काबिज है जबकि विपक्ष नई नई रणनीति अख्तियार कर सत्ता को बेदखल करने के लिये हर हथकण्डे अपना रहा है परन्तु कामयाबी नही मिल रही है।इसका कारण ये है कि मोदी जिस चतुराई से जनता के रुझान को भांप लेते है उसी प्रकार विपक्ष की कमजोरी को जनता के सामने पोल खोल देते है।फिर करण ऐसा भी है कि मोदी का राजयोग कमजोरी को अवसर में बदल देता है।उनका प्रयोग जनता को पसंद आता है और राज्यो में जिस प्रकार भाजपा सरकार का उदय होता दिख रहा है उससे स्पष्ट संकेत है कि मजबूत विपक्ष वजूद में रहना सपना बन गया है।खाशकर मोदी प्रयोग उत्तराखण्ड में हार का मुंह देखने वाले पुष्कर सिंह धामी को दुबारा मुख्यमंत्री की बागडोर देकर वरिष्ठ लोगों को दरकिनार कर दिया गया जबकि कही से भी विरोध नही हुआ।दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि बहुत से उदारहण है जँहा मोदी प्रयोग सफल रहा और उनकी सरकार चल रही है। विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी, सपा के अखिलेश यादव, आम के अरविंद केजरीवाल, कम्युनिस्ट पार्टी सहित अन्य तमाम दल मिलकर भी मोदी का विरोध इसलिये नही कर पा रहे है कि मोदी जनता की नब्ज को सरलता से देखकर उस रणनीति को नई दिशा दे देते है और विपक्ष की कमजोरी को उजागर कर उन्हें भंवर में उलझा देते है और सफलता अर्जित कर जाते है। आने वाले समय मे असम और बिहार में चुनाव का दौर चल रहा है जँहा बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल काँग्रेस ओर असम में हिमंता सरमा की सरकार के लिए मुसीबत का दौर है देखना दिलचस्प है कि इस चुनाव में मोदी क्या नया गुल खिलाते है ।अग्नि परीक्षा में कौन अब्बल ओर कौन फिसड्डी साबित होगा इसका निर्णय तो वँहा की मतदाता करेगी।
