विकास भी, विरासत भी भाजपा का नया नारा बना परन्तु समूचा प्रदेश वीरान
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सत्य है कि विकास के लिये पहले विनाश की सीढ़ी तय कर अमली जामा पहनाया जा सकता है।हम देवभूमि उत्तराखंड वासी प्रकृति, संस्कारो, परंपरा, सभ्यता, वेशभूषा ओर ना जाने कितने मापदण्डो पर साधक के रूप में भौगोलिक, आर्थिक मार को सहन कर रहा है बावजूद इसके उत्तराखण्ड के लोगो ने मर्यादा का पालन कर कठिन दौर गुजारा है।लेकिन उन्होंने कभी किसी सरकार से कभी कुछ मांग नही की है।अपने उत्कृष्ट स्वाभिमान के लिये ये प्रदेश अन्य राज्यो के लिये मशाल है।अपार सम्भावनाओ का ये प्रदेश आज लचर व्यवस्था और सियासतदानों के भंवर में उलझ गया है ।सरकार भी नित नए दावे ओर विकास के नए आयाम स्थापित करने के वायदे ओर लोक लुभावन सपनो से वोट की गुहार करती है।जबकि सत्य ये है कि सरकार का विकास सड़क, पटरी ओर गाँव मे नही बल्कि हवा हवाई बना अपनी उड़ान भर रहा है जनता जिनसे कोषों दूर है।
उत्तराखण्ड प्रदेश की सरंचना इतनी बेहद शक्तिशाली और अपार सम्भावनाओ का प्रदेश जँहा पर्याप्त जल, जंगल जमीन, ओर सबसे समृद्द परम्परा विरासत में मिली है।उसके अलावा सहस्त्रों वर्षों से तीर्थयात्रा का विश्व मे अग्रणीय स्थल, अध्यात्म और अपने शास्त्रों के ज्ञान का केंद्र होने पर भी आज हम तरक्की के रास्ते जो विफल होते दिखते है उनका प्रयोग कर रहे है।सच ये भी है कि इस व्यवस्था से जनता का कोई भला नही होने वाला है लेकिन पूंजीपति वर्ग का अय्यासी का अड्डा बनकर ये यँहा की विरासत ओर परम्परा को नष्ट करने में सहायक सिद्द होगा।उदारहण के लिये आज हम तीर्थाटन जिसमे हजारों लोग यात्रा पर आस्था ओर विश्वास से जाते रहे है उनको अपार कष्ट होता था लेकिन यात्रा पूर्ण कर उनके आभा मण्डल में जो तेज़, ऊर्जा सहित नारायण दर्शन का उदघोष सुनाई देता था आज वो भी गायब होता दिख रहा है।सरकार की व्यवस्था से ये पिकनिक स्पॉट बन गए है जो रील, अराजकता ओर तरह तरह की बुराइयों से जकड़ गए है।अब इस कड़ी में साहसिक पर्यटन के नाम पर राफ्टिंग व्यवसाय जिसके कारण गङ्गा की पवित्रता, निर्मलता खतरे में पड़ी है।क्या क्या बंया करे कि राफ्टिंग के नाम पर ये प्रदेश क्या कुछ नही झेल रहा है वीकेंड मेंपूरा शहर जाम नगरी… याने आवागमन ठप्प ओर दूसरा नशे का कारोबार का प्रचलन इतना अधिक हो गया है कि बच्चे इसकी जद में आ रहे। अध्यात्म और कुंभमेला तीर्थयात्रा का प्रमुख क्षेत्र को पाबंदी के बाबजूद नशे का कारोबार जनता के मना करने पर भी सरकार निरन्तर प्रोत्साहन दे रही है।अभी पर्यटन को ओर अधिक विकसित करने के लिये ऋषिकेश बैराज ओर टिहरी झील में सी प्लेन की ट्रायल सफल लैंडिंग होने से सरकार बेहद खुश नजर आ रही है।भविष्य में उत्तराखण्ड की तस्वीर बहुत अधिक भयावहक दिख रही है।आखिर क्या होगा इस देवभूमि का जँहा देवता नही राक्षसी प्रव्रत्ति को जानबूझकर आमंत्रित किया जा रहा है।अरे करना ही था तो प्रदेश को शिक्षा, सँस्कृति ओर स्वास्थ्य ,सड़को,गाँव की तरक्की, पलायन रोकना आदि आदि ऐसे छोटे कार्य कर यँहा के जनमानस का भला करना उचित था।परन्तु सरकार की दृष्टि तो विकाशशील नही विकसित करने की है जिसके लिये आधुनिकता ओर बाहरी सम्पन्न लोगों को जोड़कर उन्हें उत्तराखण्ड की पहचान को बिगाड़ने की आजादी दी जा रही है जो बर्दाश्त नही है फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कथन विकास भी , विरासत भी कैसे सुरक्षित रहेगी पूछता है भारत भूषण कुकरेती???
प्रिय पाठक गण इस मामले में खुकलर टिप्पणी करें ये हमारा ओर हमारे भविष्य का सवाल है जिस पर सरकार प्रहार कर हमें कठिन दौर की ओर ढकेल रही है।
