March 26, 2026

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मौन रहकर भी मौन को परिभाषित कर गए प्रतीक जैन, रिजल्ट कार्ड गवर्नर ने प्रदान किया

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(  संजय बडोला)

देहरादून, मौन को दो प्रकाए से ही व्यक्त किया जा सकता है ।प्रथम या तो आप उस विषय मे कुछ भी जानते नही जबकि दूसरा आप सब कुछ जानकर भी उस विषय मे कुछ बोलना नही चाहते। ऐसा ही कुछ कर गए जनपद रुद्रप्रयाग के पूर्व जिलाधिकारी युवाओं की शान जुंवा पर लगाम, सदैव सरलता और सहजता जिनका स्वभाव रहा है और जनपद रुद्रप्रयाग के लिये निष्ठावान बाबा शिव और शक्ति के उपासक भारतीय सत्य सनातन सँस्कृति के संवाहक के रूप में अपने दायित्वों का पालन करते रहे।अपने प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन, समर्पण और जनहित में सरकार के निर्देशों का पालन उनकी जिम्मेदारी है।शायद उनके इस प्रकार के कार्यो पर मुठ्ठी भर लोग जरूर उनसे द्वेषपूर्ण व्यवहार करते देखे गए ओर विरोध भी हुआ जबकि जनपद की जनता, विधायक उनके कार्यो पर बेहद खुश नजर आए।असल बात ये भी है कि सरकार का विरोध करने के बजाय ये तत्व जिलाधिकारी का विरोध करने लगे।उन्हें भारतीय सनातन ,आध्यात्म ओर तरह तरह का ज्ञान ना होने पर उनके खिलाफ मुखर हो गए इस अधिकारी का नाम युवाओ की शान ओर युवाओं की धड़कन, युवाओं के आइकॉन प्रतीक जैन ।

विरोध करना आपका अधिकार है लेकिन वो कानून के दायरे में हो, लेकिन जब आप सरकारी कार्य मे बाधा, सरकारी सम्पतियों को नुकसान, पुलिस प्रशासन से अभद्रतापूर्ण व्यवहार जैसी घृणित कार्यो को कर सरकार के लिये मुसीबत बनेंगे तो फिर कानून अपना कार्य करेगा और ये जनपद के लिए परेशानी ना बने जिला प्रशासन का प्रथम अधिकारी होने के कारण कार्यवाही किया जाना बेहद जरूरी बनता है।शायद उनकी ये कार्यवाही कुछ लोगो को नागवार गुजरी ओर फिर सियासत हुई कि उनका स्थानांतरण जनपद रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी के स्थान पर प्रबन्ध निदेशक गढ़वाल मण्डल विकास निगम कर सरकार ने उन पर लगाये गए आरोप भारतीय सनातन सँस्कृति, अध्यात्म का ज्ञान नही पर पूर्ण विराम लगाकर उनको भारतीय परम्परा के प्रमुख चार धाम यात्रा का पूर्ण प्रभार देकर भरोषा जताने का कार्य किया है। वैसे भी नियुक्ति, स्थानांतरण सेवा काल की सतत प्रक्रिया है और जब तक आप सेवानिवृत्त नही हुए है ।इससे हर कार्मिक को गुजरना पड़ता है।ये कोई दण्ड ही है बल्कि अधिकारी/कर्मचारी के विकास और ईमानदारी का परिचायक है।प्रतीक जैन के स्थानांतरण पर तरह तरह के सवाल शोशियल मीडिया में वायरल किये गए किन्तु फिर भी जैन मौन रहकर अपना नैतिक धर्म और अपनी जबाबदेही को अपनी योग्यता से करते रहे।

निगम प्रबन्ध निदेशक के रूप में उनका चार्ज लेना और फिर उनकी दक्षता की अग्नि परीक्षा जिसमे उन्होंने साबित कर दिखाया कि सही नेतृत्व ओर परस्पर टीम भावना के बल पर हर मुश्किल को सफलता में परिवर्तित किया जा सकता है।उनके आगमण पर महामहिम गवर्नर हाउस में 2 बड़े कार्यक्रम सम्पन्न हुए और लंच, डीनर की व्यवस्था निगम को दी गयी।के बेहद कुशलता ओर महामहिम की प्रशंसा को पाने में सफल रहा।फिर टिहरी में जनपद स्तरीय कार्यक्रम, राजधानी गैरसैंण में बजट सत्र जिसमे महामहिम, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, विधायक और आला अफसरों सहित प्रदेश के मीडिया बन्धुओ की आवास, भोजन व्यवस्था का जिम्मा प्राप्त होना ओर उसका कुशलता के साथ पूर्ण होना उनकी कुशल प्रशासनिक क्षमता को बताने को काफी है। ठीक इसके तुरंत ऋषिकेश गङ्गा रिजोर्ट में अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव सात दिवसीय 16 मार्च से 22 मार्च तक जिस नए आयाम के साथ प्रबन्ध निदेशक प्रतीक जैन ने सम्पन्न कर दिखाया जबकि विश्व मे युध्द की आग और भय का वातावरण व्याप्त है लेकिन वो बड़ी शान्ति और सरलता से जिसमे 10000 भारतीय युवाओं, 300 विदेशी मेहमान, 250 योगाचार्यो ओर 180 विश्वविद्यालय और स्कूलों के बच्चों ने प्रतिभाग किया।उन्होंने अपने कर्मिको को स्पष्ट निर्देश दिये कि जनसहभागिता ओर प्रत्येक व्यक्ति को बिना रोक टोक के अपनी पसन्द के अनुसार क्लास में जाने दिया जाय।योग घर घर मे अपनाने के लिये उन्होंने एक सवाल के जबाब में कहा कि हम किसी से तुलना नही करना चाहते है।योग की राजधानी है ।इसकी व्यापकता जगजाहिर हो सभी को लाभ मिले।परमार्थ निकेतन में योग वर्षों से किया जा रहा है उन्होंने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती का सहयोग आश्रीवाद हमे प्राप्त होना सुखद है। हैरीटेज ग्रुप, रन फार योग, जैन धर्म की आर्यिका पूर्णमति कुंडी माता , आर्ट ऑफ़ लीविंग के श्री श्री रविशंकर, भारतीय सांस्कृतिक के विभिन्न रूप, उत्तराखण्ड सँस्कृति, हास्य आदि सभी विद्याओं को योग , प्राणायाम, साधना के साथ पिरोने का कार्य किया गया।ये सभी कार्य टीम भावना से ही पूर्ण सफल हुए है।

इस योग महोत्सव के समापन अवसर पर उत्तराखण्ड के महामहिम राज्यपाल ले.जनरल गुरुमीत सिंह ने निगम प्रबन्ध निदेशक प्रतीक जैन को भारतीय युवा का प्रतीक बताकर उनकी प्रशासनिक, सरलता और सहजता के साथ बेहत्तर तालमेल के साथ सात दिवसीय अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव जो वास्तव में उम्मीदों से बेहत्तर अंतराष्ट्रीय मानकों को प्राप्त हुआ है उनकी मौन साधना और कर्मफल का बेहद अच्छा परिणाम है। जिसकी उन्होंने सराहना कर उन्हें मंच के बीच बुलाकर पण्डाल में खचाखच भरे अतिथियों, योग साधकों ओर मंच पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अवधेशानन्द गिरी, केबीनेट मंत्री सुबोध उनियाल, प्रेम जी, नरेंद्र बिंद्रा, सुनील भगत , उषा माता आदि को खड़ा कर उनके सम्मान में जोरदार ताली बजाकर उनकी पीठ थपथपाई गयी।शायद महामहिम के इस कार्य से जरूर जैन पर आरोप लगाने वालों को जबरदस्त धक्का लगा हो वही प्रतीक जैन मौन रहकर भी कई सवालों के जबाब देने में कारगर साबित हुए है।जय माँ गङ्गा ऐसे अधिकारी के प्रयासों की सराहना कर जनहित में कारगर साबित होने की चाहना करती है।

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