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पौष मास भयंकर ठण्ड, जीवन अस्त व्यस्त, लेकिन सियासत का गर्म मिजाज अंकिता भण्डारी को न्याय दिला पायेगा?

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ऋषिकेश, पहाड़ की बेटी अंकिता भण्डारी की मौत की गुत्थी रहस्य बना है ।आखिर कौन है वो वी आई पी जिसका बार बार जिक्र आ रहा है और ना सरकार , ना न्यायपालिका इस सवेंदनशील बिन्दु पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे है। अंकिता हत्या के दोषियों को आजीवन कारावास होने की दशा में सरकार अपने दामन को पाक साफ बता कर पल्ला झाड़ रही है वही समूचा विपक्ष सरकार पर प्रश्न खड़ा कर वी आई पी का नाम उजागर करने के बाद भी सी बी आई जांच से क्यो कतरा रही है।भयानक सर्दियों में भी समूचा पहाड़ में उबाल आ गया है ओर काँग्रेस फ्रंट फुट पर सियासती लाभ प्राप्त करने के लिये विरोध प्रदर्शन कर रही है। अंकिता भण्डारी की हत्या हो गयी है उसको कौन क्या न्याय प्रदान कर सकता है?? परन्तु इस हत्या के कारणों ओर वी आई पी का नाम जांच में सामने आने से उसके माता, पिता और परिवार के लोगो को थोड़ा शकुन मिल पाता लेकिन लगता है कि इस मामले में सिर्फ और सिर्फ सियासत का खेल सरकार ओर विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने में लगा है।तीन दशकों से हाशिये पर गयी काँग्रेस को सियासत की सँजीवनि बूटी प्राप्त हो गयी है ओर इसका फायदा वो भाजपा को कठघरे में खड़ा कर हर सम्भव लाभ लेने को मैदान में आ गयी है।

इस प्रकरण में अभी हाल ही में सहारनपुर की रहने वाली एक महिला अभिनेत्री ने शोशियल मीडिया के माध्यम से अपने को भाजपा नेता की पत्नी कहकर भाजपा के आला शीर्ष नेताओं को ही निशाने में लेकर सनसनी फैलाने का कार्य कर विपक्ष को सरकार को घेरने का मुद्दा सामने लाने का कार्य किया है। इस मामले ने पहाड़ से मैदान तक भूचाल लाकर कई प्रश्न खड़े कर देवभूमि को शर्मसार करने का दुःसाहस किया है ओर न्यायालय सहित सरकार की मंशा पर भी गम्भीर सवाल खड़े किए है।इस आडियो, वीडियो के इस समय आने का कारण भी रहस्य बना है जबकि काँग्रेस ने अपनी पार्टी में नई जान फूंकी है ओर गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत को महत्वपूर्ण जिम्मा देते हुई पार्टी को मजबूत बनाने का कार्य सौंपा है।शायद ये प्रकरण इस वक्त इस कड़ी का हिस्सा तो नही है जिसका राजनीतिक लाभ काँग्रेस को खोया सम्मान वापस दिलाने में कारगर साबित हो।यही नही इस मामले में उक्रांद, स्वाभिमान मोर्चा सहित तमाम विपक्ष सड़को पर विरोध कर सरकार से निष्पक्ष सी बीआई जाँच की मांग कर रहा है।वी आई पी के रूप में भाजपा के जिस रसूखदार का नाम सामने आ रहा है।उत्तराखण्ड प्रदेश की सरकार उसको लेकर मौन है और सरकार अपना पक्ष रखकर सबूत के तौर पर साक्ष्य एस आई टी को देने की वकालत कर जांच की बात कर रही है।सरकार का कहना है कि साक्ष्य देने वाले कि सुरक्षा सहित हर सम्भव सहायता सरकार करेगी।

अब ये मामला दिन प्रतिदिन तूल पकड़ता दिख रहा है और सरकार इस मसले पर विपक्ष के निशाने पर है।वही विपक्ष को बैठे बिठाए सरकार के खिलाफ बोलने और उसको कठघरे में खड़ा करने का मौका मिला है वो भी बिना वक्त गंवाए पहाड़ से मैदान तक अपना विरोध कर मुखर हो गए है।पहाड़ का दर्द पहाड़ ही जाने लेकिन जिस न्याय की बात हो रही है वो अंकिता भण्डारी को हरगिज नही मिलेगी जिस बेटी का वजूद ही खत्म हो गया है ओर उसके माता पिता पूरी तरह से टूट चुके सियासत का शिकार हो रहे है। ऐसे वक्त मे सरकार को चाहिए कि यही समय है, सही समय है सम्पूर्ण प्रकरण का सिलसिलेवार तरीके से जाँच कर सत्यता सामने आए ओर दोषी चाहे कोई भी हो हरगिज ना बचने पाए।जनता सी बी आई जाँच चाहती है तो फिर क्यों नही ये जांच त्वरित बैठा दी जाय, परत दर परत सभी बातें सामने आयेगी दोषी सलाखों में होंगे ओर सरकार के प्रति जनता का विश्वास कायम होगा।

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