November 30, 2025

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सशक्त परिवार के लिए नारी का स्वस्थ होना जरूरी – गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग से ग्रसित महिलाओं को रहना होगा जागरूक – एम्स में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम 

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29 नवम्बर 2025

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गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग वाली महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में नियमित समय पर स्क्रीनिंग करवाने की बात कही गयी। बताया गया कि हृदय रोग के साथ गर्भावस्था को संभालना चुनौतीपूर्ण है लेकिन चिकित्सीय सलाह का पालन करते हुए जागरूक रहकर इससे निपटा जा सकता है।

 

हार्ट रोगों से ग्रसित महिलाओं में स्वास्थ्य संबन्धी जागरूकता लाने के उद्देश्य से शनिवार को एम्स ऋषिकेश में ’हार्ट डिसीज इन वुमेन ऑफ प्रोडक्टिव एज’ (प्रजनन आयु की महिलाओं में हृदय रोग) विषय पर सेमिनार और (सीएमई) सतत शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन हुआ। संस्थान के सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एण्ड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग द्वारा आयोजित जन-जागरूकता के इस कार्यक्रम में आम लोगों के अलावा बड़ी संख्या में हृदय रोग से इलाज करवाकर स्वस्थ हो चुकीं महिलाएं और उनके तीमारदार भी शामिल हुए। बताया गया कि 14 से 45 वर्ष तक उम्र की जिन महिलाओं को हार्ट सम्बन्धित समस्याएं हैं उन्हें गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के समय स्क्रीनिंग करवाना और चिकित्सीय सलाह से दवाओं का सेवन करना बहुत जरूरी है। बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान की डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने कहा कि उम्र के साथ होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक रहकर हम स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं। उन्होंने सीटीवीएस विभाग द्वारा किए जाने वाले उपचार और जागरूकता संबन्धित कार्यों की सराहना की।

 

सीटीवीएस विभाग की एडिशनल प्रोफे. और कार्यक्रम की समन्वयक डाॅ. नम्रता गौड़ ने व्याख्यान देते हुए बताया कि हृदय रोग वाली महिलाओं को चाहिए कि वह प्रजनन आयु के दौरान अपने स्वास्थ्य का नियमित चेक-अप करवाएं। उन्होंने 40 साल से अधिक उम्र वाली महिलाओं के गर्भ धारण करने पर होने वाली शारीरिक परेशानियों, दिल में छेद होने, हृदय की धमनी के सिकुड़ जाने और सांस फूलने की वजह से होने वाली दिक्कतों सहित गर्भस्थ शिशु के दिल में छेद होने की जांच और एम्स में उपलब्ध इस प्रकार की बीमारियों के इलाज के बारे में भी विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने एम्स से इलाज करवाकर स्वस्थ जीवन बिता रही कुछ ऐसी महिलाओं के बारे में भी बताया गया जिन्होंने एम्स में ही अपनी हृदय संबन्धित बीमारियों का इलाज करवाया और हार्ट रोगों से ग्रसित होने के बावजूद समय उपरान्त सुरक्षित प्रसव करवाकर वर्तमान में अब वो स्वस्थ जीवन बिता रही हैं। साथ ही उन्होंने देश की कई ऐसी महिला सेलेब्रिटीज के उदाहरण भी प्रस्तुत किए जो विख्यात होने के बाद भी हृदय रोगोें से ग्रसित हैं और जागरूक रहकर इलाज करवाने के बाद अब अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता रही हैं।

 

कार्यक्रम को चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, सीटीवीएस विभाग के हेड प्रो. अंशुमान दरबारी सहित अन्य ने भी संबोधित किया। डाॅ. शुभम रावत के संचालन में चले कार्यक्रम में डीन रिसर्च डाॅ. शैलेन्द्र हाण्डू, डीन एक्जाम प्रो. प्रशांत पाटिल, प्रो. सौरभ वाष्र्णेय, प्रो. रजनीश अरोड़ा, प्रो. वर्तिका सक्सैना, प्रो. पंकज कंडवाल, प्रो. आशी चुग, डाॅ. प्रदीप कुमार, डाॅ. अनिशा आतिफ, डाॅ. वंदना धींगरा, डाॅ. रश्मि मल्होत्रा, डाॅ. संतोष कुमार, डाॅ. अनीश गुप्ता, डाॅ यश श्रीवास्तव, डाॅ. अजय मिश्रा, डाॅ. राखी मिश्रा, सहित सीएनओ डाॅ. अनिता रानी कंसल और बड़ी संख्या में अन्य फेकल्टी सदस्य मौजूद रहे।

 

इंसेट-

सीएमई में किया महिलाओं को जागरूक

सीएमई में प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की डाॅ. अनुपमा बहादुर, डाॅ. लतिका चावला और डाॅ. कविता खोइवाल ने अलग-अलग सत्रों में हृदय रोग वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान की परेशानियों, बरती जाने वाली सावधानियों और इलाज के बारे विस्तार से जानकारी दी। एंडोक्रिनोलाॅजी विभाग की एसोशिएट प्रो. डाॅ. कल्याणी श्रीधरन ने थाइराइड व शुगर के नियंत्रण के बारे में लाभदायक जानकारी से अवगत कराया। मेडिसिन विभाग के डाॅ. पीके पण्डा ने गर्भावस्था के समय आवयकता के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल, इसके दुष्प्रभाव और बचाव संबन्धित जानकारी दी जबकि सीटीवीएस विभाग के डाॅ. राजा लहरी तथा डाॅ. दानिश्वर मीणा ने युवावस्था वाली महिलाओं के हृदय की सर्जरी और प्रसव के दौरान रक्त में आने वाली परेशानियों के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।

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