बचपन मे गजेंद्र मोक्ष से शुरुवात हुयी है, नव विद्या भक्ति का प्रभाव रहा घर मे:जया किशोरी
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ऋषिकेश, अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर सांय कालीन आध्यात्मिक सनातन सँस्कृति से योगसाधको के साथ समन्वय स्थापित उन्हें सांसारिक जगत में कैसे ईश्वर से सम्बंध बनाने के लिये बदलाव और बेलेंस स्थापित करना जरूरी है।आपको पैसा भी कमाना है, नाम भी कमाना है साथ ही अन्य कार्य भी जरूरी है लेकिन सब सनातन सँस्कृति ओर मर्यादा के दायरे में जरूरी है।भक्ति संगीत और संगीत किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाय, सुबह शाम राधा कृष्ण नाम हो जाय.. हम पुरातन सभ्यता के कारण ही हम विश्व मे अपना ध्वज का आरोहण कर रहे है। मेरे बचपन की शरुवात गजेंद्र मोक्ष से हुई और आज श्री मद भागवत कर मैं स्वयं इसको जन जन तक पहुंचने का कार्य करना है।
जया किशोरी ने कहा की पूजन,हवन, यज्ञ केवल अध्यात्म नही है ।व्रत का मतलब नकारात्मक को हटाकर सकरात्मकता की ओर बढ़ना है ।संयमित जीवन और अनुशासन आपको सरल सादगी की ओर ले जाता है।भगवान की भक्ति बुढ़ापे में नही बल्कि यौवन में की जानी चाहिए । शास्त्रों को पढ़कर ज्ञान प्राप्त होता है इसके लिये आप छोटी छोटी किताबे जो धार्मिक हो उन्हें पढ़कर ज्ञान प्राप्त करे। आज का ज्ञान पैसा कमाना सीखा रहा है किन्तु मानवीय गुण नही प्रदान कर रहा है। गुरु की महत्ता को जानने के लिये ये जानना जरूरी है जो आपको भगवान से मिलाएं वो सही गुरु है ।अगर घर मे गुरु का फोटो बड़ा लग रहा है और भगवान के फोटो छोटे हो रहे है तो फिर इससे बचने की जरूरत है।मानव को एकदूसरे के लिए कार्य करना चाहिए।
योग साधको से बातचीत में किशोरी ने कहा कि महिलाओं की संख्या कम दिखती है तो फिर उनकी पावर भी कम दिखती है ।आज भी नारी को समानता के लिये पुरुषों में निर्भर रहना पड़ता है।संघर्ष हर किसी के जीवन है केवल इनको साधकर सुधार करना है। जीवन मे परिवेश का बहुत ज्यादा महत्व है उससे बदलाव सम्भव है।आज भी सुरक्षा का जिम्मा पुरुषो का माना जाता है।श्री मद भागवत का सुखदेव प्रसंग का उल्लेख करते हुये उन्होंने समझाने का प्रयास किया।वेद व्यास ने महिलाओं को पुरुष और नारी का महत्व बताकर अपनी भूमिका का कैसे निर्वहन करे।एक दिन सुख हो या दुःख सभी खत्म होना है। अपनी जिंदगी के हीरो बने लेकिन दूसरों के नही।स्वाभिमान रहे अभिमान ना रहे। आपके हिस्से का काम कोई छीन नही सकता है।जीवन से तनाव दूर करना जरूरी है।अध्यात्म आपको जीना सिखाता है ।जया किशोरी ने कहा की सबसे पहले अपने को सुधारने की जरूरत है।आध्यात्मिक अपने आप इन बातों को सीखने का कार्य करता है।उन्होंने कहा कि मुझे किसी पर विश्वास नही है केवल ईश्वर और उनका पूर्ण विश्वास रहता है।मेरी कोई भी खाश यात्रा नही है मै रहकर भी दूर हूँ।शोशियल मीडिया लोगो से दूर कर रहा है और इससे गन्दगी ज्यादा दिख रही है जो घातक है।इससे बचना बहुत अच्छा है जो भविष्य को अच्छाई की ओर ले जा रहा है ।आज प्रकृति और इंसानों से जुड़ना जरूरी है।
आज के इस सेक्शन में महाप्रबंधक दयाशंकर सरस्वती,प्रोफेसर नरेश चौधरी,सहायक प्रधान प्रबन्धक एस पी एस रावत , चन्द्रवीर पोखरियाल, रवि शास्त्री, मनमोहन तड़ियाल,रघुवीर सिंह राणा, ओम प्रकाश भट्ट, अजय कान्त शर्मा,आशुतोष नेगी, नरेंद्र राणा,लक्ष्मी जोशी सहित हजारों योग साधक एवम निगम के आयोजन समिति से जुड़े जन शामिल रहे।इस अवसर पर निगम महाप्रबंधक पर्यटन दयाशंकर सरस्वती ने आध्यात्मिक जगत की विशिष्ठ योगनी जया किशोरी को अंग वस्त्र सहित स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया । इस अवसर पर सौम्या को भी पुष्पहार भेंट कर स्वागत किया गया।
