कैसा स्थापना दिवस जिससे राज्यान्दोलनकरियो को ही किनारा किया गया
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(Sanjay badola)
सरकार की नियत राज्य के तमाम शहीदों के सपनो ओर राज्यान्दोलनकरियो के संघर्ष के अनुरूप राज्य का सर्वागीण विकास करना प्रतिबध्द है किंतु धरातल पर दिखता उलट है।कल ही देहरादून प्रदेश राजधानी में आयोजित राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम में देश की सर्वोच्च महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू , प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित तमाम मंत्रीगण , अफसर परेड ओर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में शरीक हुए किन्तु प्रदेश के इस समारोह से कार्यक्रम जगमगा उठता उनकी कमी और सरकार की नीयत पर सवाल बनता है कि आखिकार क्या मजबूरी रही कि राज्यान्दोलनकरियो को इस कार्यक्रम में क्यो नही आमंत्रित किया गया।
यही नही सरकार की मंशा ओर नियत 23 वर्षो में कोई नया कारनामा नही कर पाने का मामला राज्य आंदोलनकारियों की चुभन ओर प्रदेश की लचर हालत से अवश्य दुखी , भयभीतओर आने वाले भविष्य के प्रति बहुत व्याकुल है।ऐसे में सरकार को इस छोटे प्रदेश के उन्नति का मार्ग जनता के अनुरूप तय करना जरूरी है।हालात ये है कि जब देश की महामहिम प्रदेश की राजधानी देहरादून में है और पूरा लाव लश्कर सहित सरकारी आला मुस्तेदी से तैनात रहा हो उड़के बाद मुख्य बाजार में दिन दहाड़े करोड़ो की डकैती हो जाना प्रदेश की कानून व्यवस्था समेत चिंता का कारण जरूर है।ऐसे में हम कँहा ओर किसके भरोशे सुरक्षित है गम्भीर सवाल है।
स्थापना दिवस कार्यक्रम में यही स्थिति जिला स्तर पर भी रही है केवल खानापूर्ति कर कार्यक्रम के नाम पर राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रण ना देकर अपने ही जानकारी पात्र लोगो को सम्मान दिया गया जिससे सवाल उठने लाजमी है। इनमें केवल पौडी जनपद ऐसा रहा है जिसने इस समारोह को तीन दिवसीय करने का निर्णय लिया है क्षेत्रीय विधायक राजकुमार पोरी , नगर पालिका परिषद यशपाल बेनाम सहित जिलाधिकारी डॉक्टर आशीष चौहान सहित तमाम विभाग सहित स्थानीय जनो ने शिरकत कर अपनी भागीदारी सामूहिक रूप में दर्ज करी है ।
आज 23 साल पूर्ण ओर 24 वे साल में प्रवेश करने का मतलब सीधे आत्मनिर्भर की ओर बढ़ता उत्तराखण्ड होता है परन्तु सत्य क्या है ये किसी से भी छिपा नही है ।इस प्रदेश में सरकार के कार्यो पर प्रश्न उठे है।भय, भ्रष्टाचार, लूट पात, भाई भतीजा वाद, वेकफुट इंट्री, मूलभूत सुविधाओं का अभाव अक्सर देखा जाना वर्तमान सरकार के लिए कुछ और कड़वे फैसले लेने की ओर इशारा कर रहा है।
देव भूमि का मान, पहचान और परम्पराए संस्कृति और मर्यादाओं के अनुरूप हो ।हर क्षेत्र पर कार्य इर आत्मनिर्भरता तय करना जरूरी है।जिनसे हम अभी दूर है। असल रेवड़ी का प्रसाद जनता को मिले तो फिर जरूर उत्तराखण्ड खुशहाल होगा।
