गढ़वाल कमिश्नरी पौड़ी का एक परिचय
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( भारत भूषण कुकरेती)
पौड़ी, हिमालय की सुरम्य गोद मे अवस्थित उत्तराखण्ड समूचे भारतीय संस्कृति का केंद्र रहा है।मध्य हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा पौड़ी नगरसमुद्र तल से लगभग 1650 मी0 की ऊँचाई पर बुआखाल की पहाड़ियों के उत्तरी-पश्चिम में किकालेश्वर की पहाड़ियों के पूर्वी ढाल के मध्य बसा है।ये नगर सन 1815 में ब्रिटिश गढ़वाल के मुख्यालय के रूप में चुना गया था लेकिन प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से 1840 में इस नगर को एक जनपद के रूप प्रदान कर दिया गया।सन 1969 में पौड़ी को गढ़वाल मंडल की कमिश्नरी के रूप में गौरव मिला।वर्तमान में ये नगर सांस्कृतिक केंद्र होने के साथ साथ स्वयम में दर्शनीय, धार्मिक और साहसिक पर्यटन को समेटे आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पौड़ी नगर कोटद्वार ओर ऋषिकेश रेलवे स्टेशनों से क्रमशः लगभग 104व130 किमी की दूरी पर स्थित है।पौडी से बर्फीले हिमालय का मनमोहक दृश्य देखने लायक ओर बाहरी पर्यटकों को आकर्षित करता है।यहाँ पर देवदार ओर चीड़ के घने जंगल देखने को मिलते है।अपार शान्ति, ताज़गी,ठंड ओर पर्यटन स्थल होने के बाबजूद भी पर्यटकों का आगमन अपेक्षा से कम देखने को मिलता है।
16 किमी वर्ग क्षेत्र में फैले पौडी नगर परिषद में 13 गाँव शामिल है।कंडोलिया मैदान ओर रांसी स्टेडियम के बन जाने इस क्षेत्र में विकास तेज़ी से हो रहा है जंहा राज्य स्तरीय ओर क्षेत्रीय प्रतियोगिताओ का आयोजन किया जा रहा है। वही दूसरी ओर घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कालेज बनने से देवप्रयाग पौड़ी सड़क मार्ग के आस पास बहुत तेज़ी से विकास हो रहा है। पौडी में 5 प्रमुख मन्दिर,एक मजिस्द, दो चर्च मौजूद है। यँहा से हिमालय की बर्फीली चोटियां जिनमे बन्दरपूँछ,स्वर्गारोहनी, नीलकंठ, गंगोत्री समूह, भागरथी, केदारनाथ , त्रिशूल, चौखम्बा, हाथीपर्वत , नन्दादेवी आदि प्रमुख है।

