श्रीमद्भागवत कथा (चतुर्थ दिवस): मनु-शतरूपा प्रसंग, पूज्य संतों के आशीर्वाद और श्री कृष्ण जन्मोत्सव के साथ दिया गया ‘स्मृति सम्मान’
1 min read

आसाराम व्यास की पावन पुण्य स्मृति में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर संपूर्ण कथा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” के जयकारों और अलौकिक भक्तिमय उल्लास से गुंजायमान रहा। कथा व्यास, कथा भास्कर आचार्य शिवराम भट्ट जी के ओजस्वी और मधुर वचनों से पंडाल भगवान की दिव्य लीलाओं से सराबोर हो उठा।
कथा के चतुर्थ दिवस पर आचार्य जी ने स्वायंभुव मनु एवं शतरूपा जी की तपस्या, उनके वंश वर्णन तथा अनेक पावन प्रसंगों को सुनाते हुए भगवान श्री कृष्ण के दिव्य प्राकट्य और जन्म कथा को विस्तार रूप दिया। जैसे ही वासुदेव जी द्वारा बाल रूप श्री कृष्ण को गोकुल पहुँचाने और नंद भवन में आनंदोत्सव का प्रसंग आया, पूरा पंडाल बधाई गीतों, ढोल-नगाड़ों और श्रद्धालुओं के भावपूर्ण नृत्य से सराबोर हो उठा।
इस अवसर पर ऋषिकेश पावन पवित्र तीर्थ के पूज्य संतों की असीम अनुकम्पा कथा स्थल पर प्राप्त हुई, जिसमें महामंडलेश्वर दयाराम दास जी महाराज, संत महामंडलेश्वर ईश्वरदास जी महाराज, केशव स्वरूप जी महाराज, परमानंद दास जी महाराज, मनोज प्रपन्नाचार्य जी महाराज, महंत जगदीश प्रपन्नाचार्य जी तथा महंत रवि प्रपन्नाचार्य जी का पावन सानिध्य व आशीर्वाद मिला। सभी पूज्य संतों ने स्वर्गीय आसाराम व्यास जी को भावभीनी स्मरणांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा धर्म, संस्कृति और समाज के प्रति निभाई गई निष्ठा व योगदान का विशेष उल्लेख किया।
कथा के दौरान स्व. आसाराम व्यास जी द्वारा स्थापित संस्था ‘गढ़ भूमि लोक संस्कृति संरक्षण समिति ढालवाला’ द्वारा ‘स्व. आसाराम व्यास स्मृति सम्मान’ का शुभारंभ किया गया। यह प्रथम सम्मान व्यास पीठ पर विराजमान वेदव्यास की प्रतिमूर्ति कथा व्यास आचार्य शिवराम भट्ट जी को सनातन धर्म के निरंतर प्रचार-प्रसार एवं विस्तार हेतु प्रदान किया गया। इस गौरवमयी क्षण पर संस्था के वर्तमान अध्यक्ष गजेंद्र सिंह कंडियाल, सचिव विशालमणि पैन्यूली, घनश्याम नौटियाल, सुरेंद्र सिंह भंडारी, धनीराम बिंजोला, रमावल्लभ भट्ट तथा महिपाल बिष्ट सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अपने प्रसंग में कथाचार्य जी ने संदेश दिया कि “भगवान की कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन को संवारने का एक दिव्य मार्ग है। जब संतों और गणमान्य जनों का मिलन होता है, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”
इस पावन अवसर पर क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी प्रतिष्ठित प्रतिभाएं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संतों और गणमान्य जनों के इस पावन संगम से संपूर्ण वातावरण अत्यंत भक्तिमय और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण नजर आया।
