गंगा तट से उठी अध्यात्म की लहर: त्रिवेणी घाट की भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ
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ऋषिकेश / मुनिकीरेती:
पतित-पावनी माँ गंगा के पावन तट स्थित त्रिवेणी घाट से अध्यात्म, भक्ति और उल्लास के त्रिवेणी संगम के बीच श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। ब्रह्मलीन पूज्य आसाराम व्यास जी की पुण्यस्मृति में आयोजित इस अनुष्ठान के प्रथम दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें ढालवाला और मुनिकीरेती क्षेत्र की मातृशक्ति, बुजुर्गों और युवाओं ने अपार उत्साह के साथ सहभागिता की।
कलश यात्रा के उपरांत कथा व्यास पीठ पर विधि-विधान से स्तंभ पूजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात कथा के प्रथम दिवस पर भगवताचार्य पूज्य श्री शिवराम भट्ट जी के श्रीमुख से संगीतमय कथा का सुंदर श्रीगणेश हुआ।
व्यास जी ने श्रीमद् भागवत पुराण के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ग्रंथ मात्र कथा नहीं, बल्कि भवसागर से पार उतरने का प्रत्यक्ष मार्ग है। उन्होंने श्रोताओं को कथा श्रवण के महत्व को समझाते हुए बताया कि जिस प्रकार गंगा स्नान से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है, उसी प्रकार भागवत कथा के श्रवण से अंतःकरण पवित्र हो जाता है और जीवन में दिव्यता का संचार होता है। प्रथम दिन की कथा ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कलश यात्रा मे मंडपाचार्य आचार्य प्रभाकर पैन्यूली, विपिन उनियाल , रोशन पैन्यूली, विमल पैन्यूली, कमल कांत चमोली जी के दिशानिर्देशन के साथ कृष्ण दीप व्यास, प्रवीण व्यास, राहुल व्यास, हर्ष्मणी व्यास, मोहन लाल नौटियाल, दिनेश व्यास, संतोष व्यास , विशालमणि पैन्यूली , रमेश पेन्यूली,परेश्वर पैन्यूली,घनश्याम नौटियाल जी सुरेंद्र सिंह भंडारी, गजेंद्र कंडियाल आचार्य रामकृष्ण पोखरियाल, सर्वेश्वर पैन्यूली, हर्ष व्यास, विनोद सकलानी, महिपाल बिष्ट,रश्मि पैन्यूली,, दर्शनी भंडारी, मीना, मदवान आदि सैंकड़ो श्रद्धालु सम्मलित हुये.
