October 1, 2026

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2027 भाजपा के लिये खतरों का ताज और सत्ता से बेदखली का संकेत दिखाई दे रहा है

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भारत भूषण कुकरेती ,वरिष्ठ पत्रकार एवं सजंय बडोला सम्पादक जय माँ गंगा न्यूज

बच्चा-बच्चा राम का, क्या प्रोग्राम है शाम का….
आजकल ये नारे अक्सर सुनाई दे रहे है सच्चाई क्या है इस विषय पर तर्क वितर्क किये जा सकते है लेकिन अगर इस नारे से सामाजिक सवेदनशीलता पर चोट पहुंचती हो तो हमारी भी नैतिक, सामाजिक जिम्मेदारी जरूर बनती है कि इसके नुकसान से भविष्य को बचाने का प्रयास होना चाहिए।

यही समझ के साथ हम इस नारे की गूँज जो उत्तराखण्ड के लिये भयावहक नजर आती है तो फिर सामाजिक चेतना, समरसता से ही इससे निपटा जा सकता है। इस विषय मे सत्ता पर सवार दल की भूमिका से ही ये नारा प्रचलन ओर भविष्य के लिये खतरा नजर आ रहा है।
इस नारे की शुरुवात राम जन्म भूमि को बाबरी मस्जिद से मुक्त करने के लिये ऊर्जावान युवान साथियों को जोडने बच्चा बच्चा राम का ,राम जन्म भूमि के काम का लेकिन आज ये नारा वही राष्ट्रीय दल जिसने राम जन्म भूमि की लड़ाई लड़कर सत्ता प्राप्त कर 22 राज्यो में अपनी ट्रिपल , डब्बल इंजन की सरकार बनाकर काँग्रेस मुक्त का नारा दिया ही नही बल्कि ये कर दिखाया और आज हाल ये है कि भाजपा का वैचारिक सिध्दांत आज दूर दूर तक नही दिखता है तो फिर अनुशासन की बात करना बेईमानी है।भाजपा विकास का नारा ओर विकास पुरुषों की संख्या में लगातार इजाफा दिखाती है और हाल ये है कि उत्तराखण्ड को संवारने के लिये हेली सेवा का विस्तार नही बल्कि यँहा के जनमानस को सड़क, पीने के पानी, कृषि के लिये जल, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, पलायन को रोकने सहित तमाम आवश्यक मूल भूत सुविधाओ की नितांत आवश्यकता है जिस पर कार्य नही हो रहा है।सत्ता पर सवार जनो को अपनी सुविधानुसार अपने चेहतों को फायदा पहुंचाने के लिये जनहितों से खिलवाड़ कर वो तमाम कार्य करने जरूरी है कि ताकि उनका अगला टिकट पक्का वो सके।उत्तराखण्ड में नशे की प्रवर्ति जिस कदर पनप रही है वो इस खुशहाल प्रदेश को बर्बादी में धकेल कर युवाओं का भविष्य खतरे में डाल घर घर मे अराजता, उत्पीड़न और भयानक रोगी बनाकर तहस नहस कर सकता है।
आजकल ये नारा भी भाजपा के पुराने वरिष्ठ जन जो लंबे अर्से से स्वयं की नकारने की बात भाजपा संगठनों से करते आये हैलेकिन बाबजूद उन्हें मलहम पट्टी लगाकर उन्हें राहत प्रदान कर अपना कुँनवा बढ़ाना चाहिए था लेकिन इनका वर्तमान समय तक तिरस्कार जारी है।काँग्रेस की भाँति ही वर्तमान भाजपा गुटों में उलझी अपनी अपनी रणनीति से बिखरती दिख रही है।ऐसे में एकीकरण के नाम पर आज भाजपा से ही ये नारा मुखर होकर निकल रहा है और इसके शिकार भी भाजपा पार्टी हो रही है।बैचारिक, अनुशासित दल जब शराब-कबाब का प्रयोग करेगा तो फिर आपसी वैमनस्य घटने के बजाय बढ़ेगा ही ओर भाजपा की आन्तरिक रणनीति भी सड़को में आम हो जाने की संभावना ज्यादा है।वर्तमान में भाजपा को जनता भी अपना वो पुराना समर्थन नही देने के मूड़ में है।जनता बहुत तंग ओर सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज है।आज सबसे ज्यादा उत्तराखण्ड में युवा मानसिकता के शिकार बने है उनके लिये योजनाओं का अभाव, रोजगार, पलायन मूलभूत सुविधाओं का अभाव यंत्र तंत्र सर्वत्र बना है लेकिन सरकार इस दिशा में कार्य कर उन्हें राहत प्रदान करे ये ना हो सका लेकिन प्रदेश में राजस्व के नाम पर शराब कारोबार का प्रचलन सारी परम्परा, मर्यादाओं को लांघकर किया जा रहा है तो फिर भाजपा ने स्वयं ये नारा बच्चा बच्चा राम का, क्या प्रोग्राम है शाम का कहने की हिम्मत जुटाई सच्चाई बतलाई है तो इसको वर्तमान भाजपा को ही विचार कर अपनी कार्यप्रणाली दुरस्त करनी जरूरी है। भाजपा के प्रति जनता में बढ़ता निराशा का भाव अगर ऐसा ही रह तो वर्ष 2027 भाजपा के लिये खतरों का ताज ओर सत्ता से बेदखली का संकेत जरूर दिखाई दे रहा है।हमने सजग किया धरातल पर प्रदेश भाजपा संगठन को कार्य करना है और जनहित में व्यापक परिवर्तन कर विकास का नया अध्याय उकेरना जरूरी है।

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