यक्ष प्रश्न सिस्टम सुधरने का नाम क्यो नही लेता, उत्तराखण्ड में अवैध नशा भविष्य चौपट ओर शराब व्यवसायी मस्त कब तक?
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(माँ गङ्गा नेटवर्क की स्पेशल पड़ताल)
आध्यामिक, चारधाम, योग राजधानी ओर लघु विश्व के दर्शन का ये कुम्भ मेला क्षेत्र पर किसकी नजर लगी है कि प्रदेश और केंद्र सरकार भी आँखे मूंद कर कुम्भकर्णी निंद्रा में नियमो को ताक में रखकर नशे का पूरा कारोबार जब सरकारी तंत्र ओर पूरी मशीनरी के बावजूद बिना भय के जगह जगह पांव पसार रहा है तो फिर जिस भबिष्य के कल्याण के लिये एक माता , पिता ओर परिवार अपने जीवन की कमाई लगाकर उसको डॉक्टर, इंजीनियर, एस डी एम, जिलाधिकारी, वैज्ञानिक, ओर अनेक सपनो को सँजोये प्रयत्नशील है वँहा सरकार की लचर व्यवस्था के चलते युवा और आम व्यक्ति नशे की जद में तबाह हो रहे है कहने को तो हम पूर्ण मद्य निषेध क्षेत्र में रहते है लेकिन अफसोस नशे का पूरा तंत्र खुलेआम ड्रग्स, अफीम, चरस, स्मेक सहित हर प्रकार के नशे से ये क्षेत्र पूरा प्रभावित है।
नशे के अवैध व्यवसाय ओर सरकार की लापरवाही के लिये जनता की आवाज निरन्तर उठती रही है परन्तु सरकार प्रदेश के विकास में इस व्यवसाय को राजस्व वर्द्दि का मूल जनक मानकर आंखे बंद ओर जनता का तिरस्कार कर रही है।नतीजा ये है आज नगर का युवा राष्ट्र का कल का भविष्य इसकी जद में आ गया है और इसकी कीमत परिवार को भुगतनी पड़ रही है।क्या सरकार प्रदेश के तमाम युवाओं को नशे का आदि बनाने को आमादा है।
आखिर कानून के रक्षक ही भक्षक बनकर ये सब अपने क्षेत्र में शरण दे तो वाकई में तखलिफ़ देने वाला विषय है।कल जब चहल पहल ओर भीड़ भाड़ वाले स्थल पर जँहा दुकान से सटकर अनेक परिवार रहते है वँहा पुलिस को शराब बिक्री की भनक ना होने पर महिलाओं ने ही अपनी सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया।नगर की तमाम महिलाओं ने नगर पालिका पतिषद की सभासद नीलम बिजल्वाण के नेतृत्व में भारी संख्या में दुकान पर छापा मारा जँहा अकूत शराब, पाउच का अवैध भंडारण प्राप्त हुआ। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिलाएं निरन्तर 1 घण्टे से अधिक जँहा देखे वँहा बोरी, बैग ओर पेटी में शराब ही शराब प्राप्त हुई।पालिका अध्यक्ष पुलिस प्रशासन को सूचित कर दुकान में छापा मारा लेकिन पुलिस की नए पुल पर मौजूदगी लेकिन जँहा छापा मारा गया वँहा से दूरी बनाए रखी गयी।सूत्रों के हवाले से ये टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत वार्ड नम्बर 6 है लेकिन पुलिस टिहरी -देहरादून की सीमा के पचड़े में पड़ी रही।महिलाओं का व्यापक विरोध की कार्यवाही ने पुरुष समाज को चेताने का कार्य किया ।इस कार्यवाही में ऋषिकेश पाषर्द सुरेन्द्र सिंह नेगी देखे गए और स्थानीय पत्रकारों ने इस सामाजिक बुराई ओर पुलिस प्रशासन की भूमिका को सीधे कवरेज किया।जब महिला समाज ने शराब का पूरा जखीरा बरामद किया तो उसके बाद बिलो से अन्य सामाजिक प्रेमी भी निकले।
सूत्रों के हवाले से राष्ट्रीय राजमार्ग के पास ही खुलेआम ये गोरख धंधा चलना अनेक सवाल खड़े करता हुआ सरकार ओर प्रशासन की पोल खोलता है इसके अलावा शीशमझाड़ी, , 14 बीघा, ढालवाला सहित गङ्गा तट पर हर प्रकार का नशा अवैध रूप से बेचा जाना बेहद चिंतनीय है।इससे समाज को दुष्परिणाम के अलावा कुछ और प्राप्त होने वाला नही है।सरकार राजस्व के नाम पर इस आध्यात्मिक, तीर्थ कुम्भ नगरी को प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बाबजूद भी उसके अस्तित्व को मिटाने पर तुली है तो फिर कँहा से सत्य, सनातन धर्म और युवा ससुरक्षित होगा?? ये यक्ष प्रश्न उत्तराखण्ड की जनता स्वयं उत्तर ढूंढने का प्रयास करे।नशा अभिशाप, सामाजिक बुराई है ये सभी के जहन में रहना चाहिए।
