UGC पर सप्रीम फैसला बिल वापस परन्तु सियासत तेज़, अगली सुनवाई 19 मार्च को
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(संजय बडोला)
उत्तराखण्ड(B.B), देश मे अचानक यू जी सी पर नए बिल के आने से पूरा सम्पूर्ण सवर्ण समाज अपनी नाखुशी जाहिर कर इस बिल को वापसी की मांग करने के लिये सड़को में उत्तर आया ।इस बिल के आने से पूरा सवर्ण समाज के बच्चे अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे थे साथ ही ये बिल सबका साथ, सबका विश्वास ओर सबका प्रयास का वादा करने वाली भाजपा सरकार की मंशा पर प्रश्न खड़ा कर देश के हिंदुओं को आपस मे बॉटने की साजिश लगती है।इस बिल के आने के वाद देश मे जगह जगह मण्डल कमण्डल की तरह जनता में विरोध ओर सवर्ण समाज के बच्चों को भी इसमें शामिल कर उनके भविष्य को सुरक्षा प्रदान की जाय। सवर्ण समाज का कहना है कि यू सी सी बिल लाया जाता तो बेहत्तर होता ये बिल लाकर सरकार ने सनातन को सनातन से लड़ाने का कार्य किया है।एस सी, एस ई टी ओर ओ बी सी को उच्च शिक्षा के अधिकार मिले इस पर कोई आपत्ति नही है किंतु बिना जाँच, बिना पुष्टि ओर बिना सवर्ण समाज की बात सुने उन पर कानूनी डंडा चले ये किसी को अधिकार नही है।इस यू जी सी कानून बिल पर सुनवाई करते हुई सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बिल को बिना समझे/जाने के बाद लागू किये जाने से देश को नुकसान होगा और इसमें विशेष योग्य जनो की टीम जिसके सर्व समाज के बच्चों को समरूपता ओर व्यापक अधिकार उनके भविष्य को निखार लाने के लिये मिले।ये बिल आपस मे लड़ाने ओर जबरन निर्दोष बच्चे के जीवन को बर्बाद की इज्जाजत प्रदान करने में न्यायालय अनुमति प्रदान नही करता।इस बिल के सम्बंध में 19 मार्च को अगली सुनवाई होगी जिसमें सरकार, पीड़ित ओर सवर्ण समाज के लोग अपनी दलीलें पेश करेंगे।सवर्ण समाज ने बिल वापस किये जाने को अधूरी जीत बताया हैं उनका कहना है कि सरकार लोकसभा ओर राज्य सभा मे बिल वापस ले।1 फरवरी को सवर्ण समाज एक विशाल रैली राजस्थान में असयोजित करने जा रहा है।भाजपा सरकार के प्रति बढ़ता आक्रोश दिल्ली में भी दिखने को मिल सकता है।इस बिल को लेकर विपक्ष भी सरकार के खिलाफ खुलकर मुखर नही हो पा रहा है।
वर्ष 2012 में यू जी सी पर मनमोहन सरकार लोकसभा में बिल लायी ओर इसको लागू किया गया।अब भाजपा सरकार जो सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के लिये कार्य करती है उसके माध्यम से सनातन को सनातन के खिलाफ जाति, धर्म, भाषा के नाम से लड़ाकर जो कुचक्र खेला गया उससे भाजपा का ग्राफ जिस तेजी से गिरता नजर आ रहा है जिसकी कल्पना कभी भाजपा ने नही की होगी।बिना सोचे समझे और बिना पक्ष जाने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जिस प्राथमिकता के साथ बिल लागू करने के आदेश जारी किये उससे पार्टी के अन्दर ही भयंकर असंतोष ओर इस्तीफे का दौर जारी है।इस बिल को लाने में इसकी अध्यक्षता दिग्विजय सिंह ने की जिसमे भाजपा, काँग्रेस ओर विपक्ष के तमाम सांसद ओर केंद्र के शीर्ष अधिकारी शामिल किए गए ।बाबजूद इसके बिल बिना आनन फानन के कैसे जाने अनजाने में पक्ष- विपक्ष एक राय के साथ अपनी मुहर लगाने में कामयाब हुआ।ये जांच का विषय जरूर है।समूचा विपक्ष भाजपा के खिलाफ सड़क से संसद तक लामबद्ध रहता है और विपक्ष को पानी पीकर भाजपा विकास में बाधक बताने का कार्य करती रहती है।इन तमाम समीकरणों के बाद कैसे इस बिल को भाजपा ने स्वीकार कर विपक्ष की बाँहें खिलाने का कार्य किया है जबकि देश मे हिन्दू सनातनी परस्पर हिंदुओं को जगाने का प्रयास कर एक हो रहे थे। सुप्रीम फैसला आने के बाद अभी भी सवर्ण समाज इस बारे में गम्भीर है और आगे भी अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कर रहा है।वही एस टी, एस ई टी, ओ बी सी समाज इस बिल को वापस लेने पर आहत है।उनका कहना है कि इस बिल से उनके बच्चों को मिलने वाला अधिकार से उनको वंचित किया जा रहा है फिर भी वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान कर रहे है। इस बारे में उनकी ओर से मिली जुली प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
अब इस बिल के बारे में सुप्रीम कोर्ट 19 मार्च को अगली सुनवाई करेगा जिसमे उनके द्वारा विषय मर्मज्ञ , सरकार,अटार्नी जनरल , पीड़ित पक्ष, सवर्ण समाज के पक्षकारों को सुनेगा ओर फिर अन्तिम निर्णय देश के युवाओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में देने का कार्य करेगा।अभी 1 फरवरी को समूचा सवर्ण समाज राजस्थान में अपनी जनाक्रोश रैली निकालने का कार्य कर रहा है उस पर नजर रहेगी।
