January 15, 2026

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श्री मद भागवत मानव का तारणहार जो विषय भोग को मिटाकर मोक्ष का परम द्वार है-विपिन बिजल्वाण

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मुनि की रेती, स्वर्गीय दर्शन लाल उनियाल जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्री मद भगवत कथा के तीसरे दिवस पर व्यास पीठाधीश विपिन बिजल्वाण ने कहा कि कलयुग में मनुष्य के कल्याण के लिये गीता ,रामायण और ग्रंथ कोनिहर है लेकिन मनुष्य के जीवन काल मे किये गए सभी कर्मो की मुक्ति के लिये श्री मद भागवत कथा का श्रवण मोक्ष का मार्ग है राजा परीक्षित भी इसके श्रवण से परम् धाम को प्राप्त हुए।

भगवान कृष्ण की लीला अवधूत ओर मानव के उद्वार के लिये लगभग 5200 सालों से निरन्तर गाई जा रही है लेकिन हर बार परिवर्त्तन के अनुरूप नित नए स्वरूप में अवतरित होकर सभी के पाप, ताप, संताप को समाप्त कर उसका कल्याण कर रही है।सनातन संस्कृति में धर्म की ध्वजा का महत्वपूर्ण स्थान है जिसके लिये हमारे वेद, ग्रन्थ, उपनिषद ओर धार्मिक अनुष्ठान का महत्वपूर्ण स्थान है जिसको आज पश्चिमी सभ्यता भी स्वीकार कर रही है।सन्तो का मिलन जीवन मे बदलाव और ईश्वर से मिलन का केंद्र है।जड़ भरत की लीलाओं का वर्णन करते हुए मानव के जीवन को कैसे सुखद बनाकर उसको परोपकार कीओर अग्रसर किया जाय उसका सुंदर उल्लेख कर अपने सनातन सँस्कृति के महत्व के दर्शन कराये।श्री बिजल्वाण ने कहा कि जटिलता से नही सरलता और जो आपके पास सुरक्षित है उसके आधार पर ही धर्म से जुड़िये ओर फिर जीवन मूल्यों, आदर्श ओर संस्कारो को अपनाकर सत्य को स्वीकार करे।एक दूसरे का सहयोग करे। जन्म जन्मान्तर से मुक्त होना ही मोक्ष है और गीता इसका सार है। कथा के दौरान कथा व्यास ने अजामिल ओर गणिका की कथा का वर्णन कर उनके उद्वार की कथा बताकर नारायण शब्द की महत्ता के साक्षत दर्शन कराए।भगवान का नाम ही मुक्ति मार्ग है। नव विद्या भक्ति में श्रवण, कीर्तन , वन्दन, सांख्य, भजन आदि नौ सोपानों का अगर मनुष्य प्रतिपालन करता हैतो उसका कायाकल्प होता है।भक्ति का सरल मार्ग यही से शुरू होता है।

आज की कथा में रमेश उनियाल उनकी धर्मपत्नी अमिता उनियाल, प्रवीण उनियाल , लवली उनियाल, विनोद उनियाल,पुष्पा उनियाल, अरविंद उनियाल , ज्योति उनियाल, नगर पालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, केशवानन्द उनियाल,सुनील उनियाल, अनिरुद्द मैठाणी,सजंय सेमल्टी, वीरेन्द्र बिजल्वाण, कमलेश पंत, कैमरा मेन कपिल बिजल्वाण, अजय बिष्ट , भगवती प्रसाद भट्ट, हिमांशु बिजल्वाण सहित अनेक भक्त वत्सल श्रोतागण पण्डाल में उपस्थित रहे।

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