February 25, 2026

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स्वामी समर्पनानंद सरस्वती के श्री विद्या गुरु, परम पूज्य स्वामी आदित्य तीर्थजी महाराज का महासमाधि में विलय

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योग श्री पीठ, ऋषिकेश के परम पूज्य स्वामी आदित्य तीर्थजी महाराज कल ब्रह्मलीन हो गए। उनका जल समाधि संस्कार कल दोपहर 1:30 बजे गंगा जी में संपन्न हुआ।

स्वामी आदित्य तीर्थजी महाराज पूर्णतः मुक्त आत्मा थे, जिन्होंने उत्तरायण के शुभ काल में ब्रह्मलोक में विलय प्राप्त किया। उनका संपूर्ण जीवन माँ दुर्गा भवानी एवं माँ पारास्वरी त्रिपुरा सुंदरी आदि शक्ति की आराधना को समर्पित रहा। वे दंडी स्वामी शंकराचार्य परंपरा के महान संत थे, जिन्होंने श्री विद्या साधना की पूर्ण (षोडशी) और शास्त्रोक्त प्रणाली से दीक्षा प्रदान की।

उक्त  जानकारी देते हुए स्वामी समर्पनानंद सरस्वती ने बताया कि मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि वे मेरे जीवन में आए। उन्होंने 2022, 2023 और 2024 में मेरी पंचाग्नि साधना के दौरान दर्शन देकर मुझे अवधूत परमहंस संन्यासी की उपाधि प्रदान की और मेरी साधना के लिए अपना संपूर्ण आशीर्वाद दिया। 2021 में, उन्होंने मुझे षोडशी श्री विद्या साधना की संपूर्ण और विधिवत दीक्षा प्रदान की। अपने जीवनकाल में उन्होंने केवल दो व्यक्तियों को यह दिव्य साधना प्रदान की—मुझे और एक अन्य आत्मा को, जो मेरे हृदय के अत्यंत समीप हैं।

उनकी दिव्य उपस्थिति, आध्यात्मिक ज्ञान और माँ आदि शक्ति के प्रति उनकी निष्ठा युगों तक साधकों को प्रेरित करती रहेगी।

 

 

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