September 13, 2026

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अहम को त्याग, बोली, भाषा को अपनाना ही हिंदी भाषा को वैश्विक पहचान दिला सकती है-प्रो.अधीर

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ऋषिकेश, हिंदी भाषा की पूर्व दिवस पर प्रेस क्लब मुनि की रेती द्वारा आयोजित गोष्ठी में श्री देव सुमन विश्वविद्यालय के प्रो.अधीर कुमार जो मूल रूप से बिहार बेगूसराय के निवासी है और 27 साल उत्तराखण्ड में शिक्षा जगत में उल्लेखनीय कार्य कर रहे है।उन्होंने कहा कि जो खुश है वो एक जैसे ही है और जो अलग अलग है वो आपस मे बंटते दिखते है और सब मूर्खता में एक है।राज्य भाषा हिंदी को वैश्विक पहचान बनाने के लिये अंहकार के मूल को त्यागना ओर बोली, भाषा, रहन, सहन ,सँस्कृति, परम्परा का संवर्ध्दन आवश्यक है।उन्होंने कहा कि हिंदी राज्य भाषा कैसे हो सकती है क्योंकि कोई भी सबसे पहले अपने माता पिता से बोले जाने वाली बोली को स्वीकार करता है और फिर प्रयोग करता है तो फिर ये कहना कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है ये कहना निर्रथक है। भाषा से हमारा इतना अगाढ़ प्रेम क्यो है शब्द और अर्थ का रिश्ता महत्वपूर्ण होना चाहिए जिस दिन भाषा मे अंहकार खत्म होगा उसी दिन हिंदी मातृ भाषा का स्वरूप बनकर वैश्विक पटल पर अपना रंग दिखाने का कार्य करेगी। भाषा को लेकर कोई विवाद नही है हिंदी को राष्ट्रीय भाषा की आवाज दक्षिण-पश्चिम से ही शुरू हुई है।उसके बाद ही इसमें हिंदी भाषी लोगों ने अपनी हुंकार भरने का कार्य किया है।उनका मानना है कि बोली भाषा और लोगो को अपनाना होगा तो फिर वो भी हमे अपनाना शुरू करेंगे।

आज नगर पालिका परिषद मुनिकी रेती के सभागार में मुख्य अथिति प्रो.अधीर कुमार, विशिष्ट अथिति नीलम बिजल्वाण, कार्यक्रम अध्यक्ष महंत मनोज द्विवेदी सहित प्रेस क्लब के सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुवात की गई ।इस अवसर पर प्रेस क्लब ने अथितियों को पुष्प गुच्छ एवं प्रेस क्लब का स्मृति चिन्ह प्रदान कर तमाम अथितियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर नगरकी पालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण ने कहा कि हिंदी को सबसे पहले अपने घर, परिवार, समूह में अपनाना होगा । जब आज हिंदी को अपने घर मे स्थान ना देकर अंग्रेजी को प्रमुखता दी जा रही है उन्होंने प्रेस क्लब के कार्यक्रम की सराहना कर तमाम आये प्रबुध्द जनो का स्वागत सत्कार ओर अभिन्नदन किया। उन्होंने कहा कि अपनी गढ़वाली बोली को भी हमे बढ़ावा देकर भविष्य को सिखाने का प्रयास करना चाहिए।वरिष्ठ एडवोकेट रमाबल्लभ भट्ट ने हिंदी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है विषय पर सारगर्भित चर्चा कर अपनी पुरातन पहचान से परिचित कराया। पूर्व शिक्षा से जुड़े विनोद द्विवेदी ने कहा कि भाषा सँस्कृति की गहराई, मर्यादा है ।आज वैश्विक पटल पर हिंदी को अपनाने का कार्य हो रहा है।उन्होंने कहा कि हमारे शब्द जो सँस्कृत से निकले है और अंग्रेजी में उनको हम हिंदी की तरह ही लिखकर प्रयोग करते है। प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सूर्य चन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि मुगल कालीन ओर अंग्रेजी परतंत्र से बाहर निकल हम अपनी बोली , भाषा का प्रयोग कर ही हिंदी को नई ऊर्जा प्रदान कर सकते है। इसके अलावा विश्वम्भरी भट्ट ने एक तरफ भाषा दूसरी तरफ अभिलाषा… सतेंद्र चौहान ने जैकी कोई बोली नी, भाषा नी , समझो वेकी कोई बोई नी बाबा …, कविवर रामकृष्ण पोखरियाल ये हिंदी खूब महान है, ये हिंदी पवित्र महान है…डॉक्टर रश्मि पैन्यूली कलम से जुड़ी मेरी कहानी… महेश चित्कारिया ने भारत माता के माथे एक बिंदी… आवाज संस्था के अध्यक्ष खामोश जल रहा हूँ .. का काव्य वाचन किया।इस गोष्ठी में जगदम्बा कण्डारी, भगतराम बिजल्वाण सहित अनेक लोगो ने अपने सम्बोधन से हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर डॉक्टर रश्मि पैन्यूली द्वारा प्रकाशित काव्य सप्त रश्मि का विमोचन किया गया ।

कार्यक्रम अध्यक्ष मनोज प्रपन्नाचार्य ने हिंदी के महत्व को बतलाते हुये कहा कि आज बेहद खुशी होती है जब विदेशी मेहमान भी हिंदी शब्द का प्रयोग कर कुशल क्षेम पूछते है और हिंदी सीखने का प्रयास करते है। कार्यक्रम में आये सभी जनो का आभार व्यक्त कर उन्होंने हिंदी को घर घर अपनाने की बात की। इस गोष्ठी में खुशहाल सिंह राणा, सत्येंद्र सिंह रावत, ह्रदय राम सेमवाल, देवेंद्र दत्त जोशी, सुनील कपरूवान, विनोद कुमार ध्यानी, जबर सिंह पँवार, भगवती प्रसाद उनियाल,गोपाल दत्त खण्डूरी,पूर्णानन्द बहुगुणा, शंकर दत्त पैन्यूली, शूरवीर सिंह चौहान, कमल सिंह राणा,डॉ संतोष व्यास, विशाल मणि भट्ट, विनोद बिजल्वाण,योगेश राणा, इंद्रा आर्य, सीमा बिजल्वाण, मीना मदवाण, गुरु प्रसाद रनाकोटी, राजीव पँवार,मोर सिंह पोखरियाल घनश्याम नौटियाल सहित अनेक जन मौजूद रहे। प्रेस क्लब केअध्यक्ष सजंय बडोला, महासचिव आशीष लखेड़ा, उपाध्यक्ष भारत भूषण कुकरेती, कोषाध्यक्ष धनीराम बिंजोला, नवीन चंद्रा, आशीष कुकरेती सहित क्लब सदस्य मौजूद रहे।गोष्ठी का संचालन सुदीप पँचभैय्या ने अपने निराले अंदाज में कर वाहवाही लूटी।

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