JMG News

No.1 news portal of Uttarakhand

समस्त पितरों के निमित्त सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

1 min read

ऋषिकेश : पतित पावनी मां जान्हवी गंगा के मंगलमय तट पर पूजा अर्चना कर समस्त पितरों के निमित्त सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ त्रिवेणी घाट से चौहान वेडिंग प्वाइंट राजीव ग्राम कलश यात्रा का प्रारंभ हुआ ।
व्यास पीठ पर पंडित श्री आयुष कृष्ण नयन जी महाराज के श्री मुख से श्रीमद् भागवत कथा के महत्व का श्रवण करवाते हुए कहा कि
कथा की सार्थकता जब ही सिध्द होती है जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल ‘ मनोरंजन ‘, कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी । भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शंाति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण,भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।

श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।

भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं।श्रीमदभागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है

सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। ब’चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। संत महात्मा की उपस्थिति में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ
इस अवसर पर व्यासपीठ पर विराजमान पंडित श्री आयुष कृष्ण नयन जी महाराज
तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज
सरोजिनी देवी श्रीमती अंजना विमल ग्वाड़ी श्रीमती नीति कमल ग्वाड़ी श्रीमती पूनम निर्मल ग्वाड़ी सोहनलाल मदन मोहन बृजमोहन गेंदालाल राजेश्वर प्रसाद वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती ‌ बीना जोशी
विशेश्वर उनियाल अमिता उनियाल शीला भट्ट मुन्नी चौहान इंदु पवार आदि लोग उपस्थित रहे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News