ऐपण कला से संवार रहीं आत्मनिर्भरता की राह, दो बहनों ने दिया पारंपरिक हुनर को नया आयाम
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‘ ऐपण बाय सिस्टर्स’ के ज़रिए मीना और मोनिका मडवान की अनोखी पहल, करवाचौथ के लिए तैयार किए विशेष ऐपण सेट
मुनिकिरेती। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की पहचान ऐपण कला अब पारंपरिक संस्थाओं और पूजा की चौकियों से आगे बढ़कर स्वरोजगार का माध्यम भी बन रही है। इसी दिशा में नगर पालिका परिषद मुनिकिरेती-ढालवाला के वार्ड नंबर 7 निवासी दो बहनें मीना मदवाण और मोनिका मदवाण अपने हुनर के दम पर इस पारंपरिक कला को नई पहचान देने का प्रयास कर रही हैं।
दोनों बहनों ने ‘ऐपण बाय सिस्टर्स’ के नाम से अपनी पहल शुरू की है। इस माध्यम से वे उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। करवाचौथ पर्व को ध्यान में रखते हुए दोनों बहनों ने विशेष ऐपण सेट भी तैयार किए हैं, जो पारंपरिक कला और पर्व की सांस्कृतिक भावना को एक साथ जोड़ते हैं।
ऐपण कला उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शुभ अवसरों, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों पर बनाई जाने वाली यह कला आमदनी से प्रदेश की परंपराओं को जीवंत रखे हुए है। मीना और मोनिका की यह पहल इसी विरासत को छूने के
