वरिष्ठ नागरिकों को अधिकारों के प्रति किया जागरूक*
1 min read

*भरण-विधि-निर्देशन अधिनियम की दी गई जानकारी, अधिकार के हनन पर निःशुल्क सहायता प्राप्त करने का प्रश्न*
*सूचना/पौड़ी/01 अक्टूबर 2026:*
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विकासखंड कोट के ग्राम उद्घाटनचौरी में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कैथोलिक एवं वृद्ध नागरिकों से संबंधित माता-पिता एवं वृद्ध नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 वृद्ध नागरिकों से संबंधित विभिन्न कानूनी संप्रदायों की जानकारी दी गई।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज नाज़िश कलीम ने बताया कि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति को वरिष्ठ नागरिक माना जाता है। उन्होंने कहा कि जो बुजुर्ग नागरिक या माता-पिता स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, वे अपने वयस्क बच्चों से भोजन, वस्त्र, आवास एवं चिकित्सा जैसी आवश्यकताओं के लिए भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान से वंचित जीवन के अधिकार, आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा, संपत्ति की सुरक्षा और भरण-पोषण अधिकरण के समग्र आवेदन की प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी दी।
सचिव ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज के महत्वपूर्ण खड़ियाघर हैं। उनके अनुभव एवं ज्ञान का सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। वे बुजुर्ग नागरिकों से अपने अधिकार के प्रति सलाहकार रहने और किसी भी कानूनी समस्या के लिए अधिकार के हनान की स्थिति में चुप न रहने की अपील करते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, सुरक्षा गरिमा एवं संपूर्ण जीवन उपलब्ध कराने की मांग की।
रिटेनर कोर्ट के वकील गजेंद्र सिंह रावत ने नॉर्थ ईस्ट को मुफ्त विधिक सहायता, लोक, विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाएं और राष्ट्रीय सेवा प्राधिकरण के डोमिनिक 15100 के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने लोगों से उपलब्ध सामग्री सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की मांग की।
इस पर ग्राम प्रधान वीरेंद्र सिंह, ग्राम विकास अधिकारी विकास थपलियाल, अधिकार मित्र स्वाति देवी एवं शिवानी देवी सहित वरिष्ठ नागरिक एवं ग्रामीण अवसर उपस्थित रहे।
