हौसलों की उड़ान, निगम की बनी पहचान,आपदा, भौगोलिक परिस्थितियों के बाबजूद टीम भावना मूल मंत्र
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GMVN के 51 वें वर्ष प्रवेश पर विशेष ले
(सजंय बडोला एवम भारत भूषण कुकरेती)
# पर्वतीय विकास परिषद वर्ष 1973 से शुरुवात
#1976 में पर्वतीय विकास निगम को जी एम वी एन ओर के एम वी एन में विभक्त किया गया
#इसके मूल भावना में छिपा था रोजगार, पलायन ओर युवाओं को प्रेरित करना
#तीर्थयात्रा के साथ स्थानीय पैदावार को बढ़ावा देकर किसानों को बाजार उपलब्ध कराना।
# GMVN का समर्पण ,त्याग का परिणाम निरन्तर साख में इजाफा
#संसाधन,आपदा ओर सियासत के हस्तक्षेप भी होसलो की उड़ान में बाधा ना बनने दिया
#आपदाओं ओर विपदाओं को अवसर में बदलने का मादा
#51 वें वर्ष में प्रवेश परन्तु निगम नियोक्ता के रूप में भारत के प्रतीक, प्रतीक जैन देने जा रहे नई धार ।
#उत्तराखण्ड के गवर्नर खुलकर कर चुके है कार्य की प्रशंसा।दिव्य ओर भव्य पण्डाल में हजारों जनो से ताली बजाकर सराहना चर्चा में।
गढ़वाल मण्डल विकास निगम लिमिटेड आज अपनी उम्र के 51 वें वर्ष पर प्रवेश कर गया है।अपनी इस लम्बी दौड़ में संघर्ष की कड़ी बड़ी है ।1976 में दो भागों में विभाजित गढ़वाल मण्डल विकास निगम को उत्तराखण्ड ओर कुमाऊँ मण्डल विकास निगम को कुमाऊँ प्रभाग के विकास, रोजगार और वँहा पैदा होने वाली फसलों की खरीद कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है ओर फिर उस खरीदे गए सामान को अन्य राज्यो को उपलब्ध कराकर विकास की धारा से जोड़ना प्रमुख रहा।इसके अलावा चार धाम यात्रा का संचालन बाबा काली कमली के बाद अगर किसी ने बखूबी निभाया है तो उसका नाम गढ़वाल मण्डल विकास निगम रहा है।आज भी अपने कार्य सँस्कृति से देश और विदेश में अपनी अमिट छाप अंकित है।
उत्तराखण्ड में तीर्थ यात्रा का संचालन किया जाना बेहद कठिन और संसाधनों की बहुत बड़ी कमी होना प्रमुख रहा है।यँहा की भौगोलिक, सांस्कृतिक, खान पान, वेशभूषा ओर परम्पराए विशिष्ठ रही है । लेकिन निगम की टीम ने जिस बेहतरी से इसको निष्पादन कर दिखाया उससे उसकी निरन्तर साख बढ़ती गयी और देश के विभिन्न्न महानगरों में भी निगम के कार्यालयों की स्थापना व्यवसाय वृद्धि में अपनी भूमिका बखूबी निभाने में सफल रहा । निगम की स्थापना1976 में हुईपरन्तु सियासत का हस्तक्षेप इसका हौसला बढ़ाने के बजाय नकारात्मक सोच को जन्म देता रहा और अक्सर सुना गया निगम बंद के कगार पर है आज निगम 51 वें वर्ष तक का कुशलता पूर्वक संचालन कर गया है।लेकिन ये बंद नही हुआ पर विरोधियों की बोलती बंद कराने में सफल रहा है।
उत्तर प्रदेश के समय से जिस तेजी के साथ निगम ने अपने व्यवसाय को बढ़ाने में सफलता के आयाम स्थापित किये उनसे अन्य निगमो की चिंताएं भी बढ़नी स्वभाविक रही है। वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड राज्य अपने अस्तित्व में आया जिसका सारा जिम्मा निगम ने दिन रात मेहनत कर असम्भव को भी सम्भव में तब्दील कर दिया ।आज भी महामहिम राष्ट्र्पति, प्रधानमन्त्री, विदेशी मेहमान, गवर्नर हाउस, विधानसभा ओर अन्य कोई भी सरकारी कार्यक्रम हो तो उसकी सभी माकूल जिम्मेदारी निगम को दी जाती रही है और इस उम्मीद पर निगम टीम अपनी प्रशंसा के झण्डे गाड़कर अपनी प्रतिभा, दायित्व को बताने में कारगर सिद्द हुआ है। निगम की वर्तमान आर्थिक हालात प्रदेश में निरन्तर आ रही आपदाओं, सम्पत्तियों का नुकसान, पर्यटकों को अपनी साख बढ़ाने के लिये शत प्रतिशत रिफण्ड करने के कारण वेतन के रूप में भारी धन व्यय करना पड़ता है जो विकास में बाधक बना है।दूसरी ओर निगम के अनुभवी कार्मिक जो अपने कार्यों में दक्ष रहे है उनके लगातार सेवानिवृत्त होने पर कुशल कर्मिको का अभाव खतरा बना है।अभी वर्तमान में निगम नियोक्ता का पदभार युवा प्रतीक जैन के हाथों में सरकार ने भरोषा जताया है और उन्होंने पदभार ग्रहण कर अपने कार्यो की झलक दिखाने का कार्य कर स्पष्ट संकेत दिए है कि कोताही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नही होगी।अपने कार्य के प्रति सकारात्मक भाव से कार्य करने वाले को प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा। चुनोतियाँ जरूर है उसको टीम भावना से मिलकर दूर करना है।सेवा भाव जितना मजबूती से पर्यटकों को प्रदान किया जाएगा उतना ही अधिक विश्वास हमे व्यवसायिक गतिविधियों में लाभ प्रदान करने का कार्य करेगा। अब ऐसे में जब विश्व मे महाविनाशक युध्द का ताण्डव चल रहा है और एल पी जी गैस, पेट्रोल-डीजल ओर मूल भूत आवश्यकताओं की कमी से समूचा विश्व प्रभावित है तो उत्तराखण्ड कैसे अछूता रह सकता है जिससे आगामी यात्रा काल बहुत अधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है वही निगम में निरन्तर योग्य कर्मचारियों का अभाव लक्ष्य को भेदने ओर राह में कांटा जरूर बना है।सरकार यदि प्रदेश में तीर्थयात्रा ओर रोजगार , पलायन को लेकर गम्भीर है तो निगम को पूर्ण जिम्मेदारी प्रदान कर पर्यटन विकास परिषद को निगम में विलय कर राज्य कर्मचारियों का दर्जा प्रदान कर नई इबारत शुरू करने की मुहिम का हिसा बने।निगम के 51 साल, बेमिशाल रहे है।अपनी बेशकीमती सम्पत्तियों को खोकर भी अपनी साख को अपने बलबूते बचाकर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ है। निगम जैसा कोई नही, ये साबित निगम टीम ने किया है ,यंत्र, तंत्र, सर्वत्र विभागों , मन्त्रियों ओर आला अफसरानों के साथ निगम कर्मी अपनी सेवाएं बखूबी करते देखे जा सकते है ।
शुभकामना संदेश

“गढ़वाल मण्डल विकास निगम लि.के पर्यटन, विपणन, निर्माण अनुभाग के समस्त अधिकारी/कर्मचारियों को निगम स्थापन्ना दिवस की असीम शुभकामनाये ओर बधाई देता हूं।
निगम टीम भावना के साथ असम्भावनाओ को भी अवसर में परिवर्तित करने में सफल रहा है जिसका असर हमे विपदा, आपदाओं सहित तमाम बुराइयों के निस्तारण में कारगर सिद्द हुआ है।आज वैश्विक मंदी, महाविनाशक युध्द के बाबजूद भी उत्तराखण्ड का पर्यटन व्यवसाय ओर शान्ति विश्व को आकर्षित करने में अपनी भूमिका का कुशलता से निर्वहन कर रहा है।आगामी यात्रा काल की शुरुवात 19 अप्रैल 2026 से हो रही है जिसके लिये आप सभी टीम परिवार को एकजुट परस्पर सहयोग से अधिक से अधिक व्यवसाय अर्जन कर प्रदेश को विकसित करना है।
आशा है आप निगम हित मे अपना शत प्रतिशत योगदान देकर हर कदम पर सफलता को अर्जित कर प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका का भली भाँति निर्वहन करें।”
शुभकामनाओं के साथ
प्रतीक जैन
प्रबन्ध निदेशक
GMVN
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