बिना डाॅक्टरी सलाह के दवा न छोड़ें किडनी रोगी – विशेषज्ञों ने दी भोजन में नमक कम रखने की सलाह, प्रोटीन का करें उपयोग
1 min read

– एम्स में आयोजित हुआ जन जागरूकता कार्यक्रम
10 मार्च, 2026
————
विश्व गुर्दा दिवस के उपलक्ष्य में एम्स में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मरीजों, तीमारदारों व अन्य लोगों को गुर्दे से सम्बन्धित बीमारियों के प्रति जागरुक किया गया। साथ ही उन्हें गुर्दा रोगों के लक्षण, बचाव और संस्थान द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे इलाज की जानकारी देते हुए अंगदान के प्रति प्रोत्साहित किया गया।
संस्थान के गुर्दा रोग विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुर्दा रोग विभाग के एसो. प्रोफे. डाॅ. दीपेश धूत ने किडनी रोगों और उनके लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में यह बीमारी अनियंत्रित बीपी और शुगर की वजह से पनपती है। उन्होंने क्रोनिक किडनी रोगियों को सलाह दी कि अपनी दिनचर्या के अनुरूप खान-पान को सही रखते हुए शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढ़ने न दें और साथ ही क्रिएटिनिन बढ़ने पर बिना डाॅक्टरी सलाह के दवा न छोड़ें। डाॅ. दीपेश ने किडनी रोगों के प्रति जागरूकता बरतने को कहा और बताया कि किडनी रोगियों को बिना डाॅक्टरी सलाह के पेन किलर दवा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने किडनी रोग की विभिन्न धारणाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। डायलेसिस करवाने वाले रोगियों को उन्होंने सलाह दी खानपान में परहेज रखकर उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन लेकर अपने भोजन में नमक कर रखें और केला, संतरा, आलू व नारियल पानी जैसे पोटेशियम पदार्थों से बचें।
विभाग की एसोे. प्रोफे. डाॅ. शेरोन कंडारी ने उपस्थित समुदाय को गुर्दा प्रत्यारोपण और अंगदान के प्रति प्रोत्साहित करते हुए जरूरतमंदों का जीवन बचाने के लिए किडनी डोनेट करने का आह्वान किया। उन्होंने गुर्दा प्रत्यारोपण की धारणाओं, प्रत्यारोपण की आवश्यकता व प्रक्रिया, प्रत्यारोपण के बाद रोगी दीर्घकालिक समाधान और जीवन की गुणवत्ता आदि के बारे में लाभकारी जानकारी दी। डाॅ. कंडारी ने किडनी दाता, प्रत्यारोपण की तैयारी, प्रत्यारोपण के बाद रोगी की देखभाल व संभावित जटिलताओं को बारीकी से समझाया और शुरूआत के पहले वर्ष में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
नेफ्रोलाॅजी विभाग की रेजिडेन्ट डाॅक्टर संदीप कौर के संचालन मे चले कार्यक्रम को नेफ्रोलाॅजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफे. डाॅ. साहित गर्ग व अन्य ने भी संबोधित किया। वक्ताओं द्वारा गुर्दा रोगों के लक्षण, डायलिसिस प्रक्रिया से किया जाने वाला इलाज और किडनी रोगों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। इस दौरान स्वास्थ्य लाभ ले रहे कई किडनी रोगियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार अब वह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। कार्यक्रम में जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रोफेसर रविकांत, नेफ्रोलॉजी विभाग के विभिन्न एसआर, जेआर, नर्सिंग अधिकारी और रोगी व तीमारदारों सहित कई लोग मौजूद रहे।
इंसेट-
एम्स कर चुका 22 लोगों में गुर्दा प्रत्यारोपण
ऋषिकेश। कार्यक्रम के दौरान डाॅ. शेरोन कंडारी ने बताया कि एम्स ऋषिकेश द्वारा अब तक गुर्दा प्रत्यारोपण के 22 मामले सफलता के साथ किए गए हैं। एम्स को एक उन्नत गुर्दा प्रत्यारोपण बताते हुए उन्होंने बताया कि ब्रेन डेथ घोषित हो चुके एक व्यक्ति के अंगदान से 8 जरूरतमंद लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। कहा कि दूसरों का जीवन बचाने वाला व्यक्ति महादानी होता है। देश में प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है। डाॅ. कंडारी ने अंगदान से जुड़े सभी प्रकार के भ्रम दूर किए और कहा कि अंगदान प्रक्रिया में धर्म आढ़े नहीं आता है। सभी धर्मों के लोग अंगदान कर सकते हैं।
