देवप्रयाग की ऐतिहासिक नक्षत्र वेधशाला में हुए प्राचीन विज्ञान के दर्शन”
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सू.वि./टिहरी/दिनांक 08 मार्च, 2026
“देवप्रयाग की नक्षत्र वेधशाला में खगोलीय रहस्यों से रूबरू हुए ‘हिमालय O2’ महोत्सव के प्रतिभागी”
“देवप्रयाग वेधशाला में प्राचीन विज्ञान का साक्षात्कार, प्रतिभागियों ने जाना खगोलीय ज्ञान”
“देवप्रयाग में ‘एस्ट्रो-टूरिज्म’ की पहल, नक्षत्र वेधशाला में प्रतिभागियों ने समझे खगोलीय यंत्र”
टिहरी महोत्सव 2026 “हिमालय O2” के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों की कड़ी में महोत्सव के 20 प्रतिभागियों और आगंतुकों ने देवप्रयाग स्थित सुप्रसिद्ध नक्षत्र वेधशाला का भ्रमण कर भारतीय खगोल विज्ञान की समृद्ध विरासत का साक्षात्कार किया।
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल की पहल पर आयोजित इस विजिट का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को हिमालयी क्षेत्र में छिपे प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान और ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू कराना रहा। वेधशाला पहुँचने पर सभी आगंतुकों का स्वागत किया गया, जहाँ उन्होंने सदियों पुराने खगोलीय यंत्रों और दुर्लभ अभिलेखों को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया।
वेधशाला के प्रबंधक डॉ. प्रभाकर जोशी ने इस दौरान विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह केंद्र प्राचीन काल से ही काल-गणना और खगोलीय घटनाओं के सटीक आकलन का मुख्य आधार रहा है। उन्होंने यहाँ सुरक्षित रखी गई बहुमूल्य पांडुलिपियों, प्राचीन चंद्र घटी, सूर्य घटी और जल घटी सहित तमाम ऐतिहासिक उपकरणों के कार्य करने की तकनीक को विस्तार से समझाया।
प्रतिभागियों ने विशेष रूप से सूर्य घटी के माध्यम से समय की सटीक गणना के प्राचीन भारतीय विज्ञान को गहराई से समझा। डॉ. जोशी ने बताया कि यहाँ उपलब्ध पांडुलिपियाँ न केवल ज्योतिष बल्कि गणित और खगोल शास्त्र के क्षेत्र में हमारे पूर्वजों की महानता का जीवंत प्रमाण हैं।
महोत्सव के तहत की गई इस ज्ञानवर्धक यात्रा ने प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर दिया कि ‘हिमालय O2’ केवल प्रकृति और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी बौद्धिक संपदा के संरक्षण का भी अभियान है।
भ्रमण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में जिज्ञासु युवा मौजूद रहे। आगंतुकों ने वेधशाला की ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण और डॉ. प्रभाकर जोशी द्वारा दिए गए ज्ञानपरक व्याख्यान की सराहना करते हुए इसे महोत्सव का सबसे यादगार अनुभव बताया। इस यात्रा के माध्यम से देवप्रयाग को न केवल एक धार्मिक पर्यटन केंद्र, बल्कि ‘एस्ट्रो-टूरिज्म’ (खगोलीय पर्यटन) के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
इस मौके पर द हिडेन हिमालय संस्था के इन्सटेक्टर धीरज महर, दीपक, योग टीचर साक्षी सेमवाल, नरेश नेगी, अंकित, दीपक सिंह आदि लोग मौजूद थे
