February 12, 2026

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चेंजिंग रूम कब और कौन बनाएगा? नगरपालिका पर्यटन विभाग, राफ्टिंग कंपनी?

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तीर्थ नगरी ,योग नगरी से विख्यात मुनी की रेती जहां पर , जी-20 के नाम पर करोड़ों रुपए का खर्च किया गया तथा गंगा किनारे की सभी व्यवस्था चाक-चौबंद की गई ,पर बड़े आश्चर्य की बात है एक व्यवस्था पर किसी की नजर नहीं गई या यूं कहें कि उसे नजरअंदाज कर दिया गया हम बात कर रहे हैं महिलाओं के चेंजिंग रूम की l  गंगा दशहरा पर लगातार ऋषिकेश में बढ़ती भीड़ और गंगा में स्नान करने वाली महिलाओं कहीं पर भी चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं होने के कारण महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा तथा जो चेंजिंग रूम बना है जिस पर दरवाजे ही नहीं है  ,l

चेंजिंग रूम न बनाने के लिए नगरपालिका मुनिकीरेती पर्यटन विभाग या फिर राफ्टिंग कंपनियों को दोषी ठहराया जाए क्योंकि पर्यटन विभाग राफ्टिंग के नाम पर लाखों रुपए वसूल करता है और करने के नाम पर क्या करता है इसका पता नहीं ,उधर राफ्टिंग कंपनियां लाखों- करोड़ों रुपए हर वर्ष कमा रही  है और फास्टिंग करने के बाद लड़कियां व महिलाओं को चेंजिंग रूम की आवश्यकता पड़ती है उनका ध्यान भी अभी तक इस पर नहीं गया या यूं कहें कि ध्यान तो गया लेकिन खर्च कौन करेगा, कुल मिलाकर इसके लिए तीनों ही दोषी हैं l

यदि नगरपालिका परिषद मुनी की रेती की बात की जाए तो लाखों रुपए लाइट के नाम पर खर्च करने वाली नगर पालिका चेंजिंग रूम बनाने से अपना पल्ला झाड़ रही है इस संदर्भ में जो सामाजिक कार्यकर्ता राजीव गॉड ने जब नगर पालिका अधिशासी अधिकारी से इस बाबत बात की तो उन्होंने अपनी कमी छुपाने के लिए सिंचाई विभाग पर ठीकरा फोड़ दिया l.

अगर नगर पालिका मुनी की रेती  के कार्यों की बात की जाए तो नदी किनारे लगाए गए बच्चों व लोगों की एक्सरसाइज के लिए लगे झूलों की बात की जाए ,जो कुछ माह पूर्व भी लगाए गए थे जिसमें से कुछ तो टूट टूट चुके हैं पर कुछ की हालत पतली है जिससे प्रतीत होता है कि पुराने झूलों पर पेंट करके  लगा दिया गया है अगर इनकी जांच की जाए ,तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा l

चेंजिंग रूम के नाम पर दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने वालों से पूछा जाए जानकी पुल पर लाखों रुपए की लाइट और भद्रकाली में लाखों रुपए की लाइट लगाकर नगर क्षेत मैं खर्च की जाने वाली धनराशि का दुरुपयोग नहीं है तो इसका जवाब उनके पास नहीं होगा l,

दूसरी तरफ पर्यटन विभाग ,वन विभाग, गंगा नदी राफ्टिंग समिति जो कि करोड़ों रुपए वसूली कर चुकी हैं किंतु अपने पर्यटकों को सुविधा देने के यह भी नकारा साबित हुई जबकि चेंजिंग रूम बनाने के लिए इतनी भी धनराशि खर्च नहीं की जानी है जोकि राफ्टिंग कंपनियों को  किसी का मुंह ताकना पड़े पर यह हिंदुस्तान है सिर्फ और सिर्फ बातें बना कर काम चल जाता है तो कार्य कौन करें l

खैर मुद्दा यह है कि नदी में स्नान करने वालीऔर राफ्टिंग करने वाली लड़कियों व महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनाया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को स्नान के बाद कपड़े बदलने में दिक्कतों का सामना ना करना पडे l

 

 

 

 

 

 

 

 

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