कवियों ने प्रस्तुत किया समकालीन विषयों पर कविता
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मुनी की रेती 27जनवरी
देर रात क्रेजी पर्यटन एवं विकास मेला 2026 में आवाज़ साहित्यिक संस्था और संस्कारशाला की ओर से काव्य गोष्ठी प्रस्तुत की गई जिसमें कवियों ने राष्ट्रभक्ति, तथा उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों से संबंधित कविताएं प्रस्तुत की
कबिआचार्य रामकृष्ण पोखरियाल *सरस* ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देते हुए कहा –
जिसने त्याग समर्पण लेकर
गोरों को ललकारा/
जिसने आजादी की खातिर लहू मांग स्वीकारा,
वो सुभाष वो वीर निराला
कैसा था बलिदानी /
23 जनवरी हरक्षण गाती उसकी अमर कहानी ।।
कबि अशोक क्रेजी ने पलायन पर अपनी कविता
हर तरफ दिखते खंडहर
और उजड़े खेत भी।
सिसकियां लेती हैं चौखट
रो रहे है घर सभी।।
कवि नरेंद्र। रयाल ने राज्य की स्थिति पर –
एक सत्र देहरादूण
एक सत्र गैरसैण
न विकास यख न वख
कैक सारा हमन रैण//
कभी दिनेश सेमल्टी जी ने
पलायन से खाली हुए गांव के बारे में कहा –
उस मिट्टी की याद बहुत आती है।
कवियत्री रश्मि नीरजा ने कहा –
चांद से खूबसूरत चांदनी है
यह तो उसकी बंदिनी है ।।
कबि सत्येंद्र चौहान ने अपनी गढ़वाली रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि-
जै कि कुई बोली नि भाषानि
वैकु कुई बयी नि ब्बा नि।।
कबि वीरेंद्र सेमवाल ने भी पलायन पर अपनी कविता कही
चलो एक बार फिर हम वहां जांए
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर संतोष व्यास ने किया
