February 22, 2026

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शराब का ठेका है या किसी के अहंकार की लड़ाईं 

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ऐसा लगता है खारासोत स्थित शराब का ठेका ठेका ना होकर किसी के अहंकार की लड़ाई है जनता ऐसा महसूस कर रही है, कि इस शराब के ठेके में किसी मंत्री का हाथ है ,क्योंकि लगातार 24 दिनों से चल रहे आंदोलन की शासन प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है शराब के ठेके को हटाने व बंद करने की लड़ाई जारी है ।

ज्ञात रहे कि जब भी इस ठेके मैं हो रही अनियमितताओं का मामला आया या ठेका बंद करने का मामला हो ,तब भी ठेके पर कोई आंच नहीं आई बल्कि इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने या आवाज उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई तथा कई तो अभी तक कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।

शराब के ठेका जब शुरू होने वाला था तब इसके खिलाफ लड़ाई शुरू की गई थी किंतु शराब के ठेके के  खिलाफ लड़ाई लड़ने वालों को अभी तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहा है पर ठेकेदार व ठेका पर कुछ भी फर्क नहीं पड़ा, यही नहीं बीच-बीच में शराब की बोतल पर ज्यादा मूल्य वसूली करने पर ठेकेदार के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई जबकि इस संदर्भ में सोशल मीडिया व समाचार पत्र की खबरों की सुर्खियां में बना रहा ।

आज जनता के बीच इस बात की चर्चा है कि यह शराब का ठेका है या फिर किसी एक व्यक्ति के अहंकार की लड़ाई है, क्या किसी का अहंकार इतना बड़ा हो गया समाज बोना हो गया, यह तो वक्त बताएगा कौन बड़ा है और कौन छोटा ।

पर सवाल वही है इतनी छोटी सी बात को इतना बड़ा क्यों बना दिया गया क्या प्रशासन इस ठेके को लेकर दबाव में है या फिर किसी एक व्यक्ति विशेष की अहंकार की प्रकाष्ठा है ?जो कि सोचनीय प्रश्न है कि समाज छोटा और व्यक्ति बड़ा हो गया । खैर बिल्ली कब तक खैर बनाएगी।

शराब के ठेके को हटाने या बंद करने की लड़ाई आखिर कब तक चलेगी जो प्रश्न यथावत है ।

 

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