आगामी नगर पालिका चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बिखराव का सीधा फायदा मिलेगा निर्दलीयों को ?
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नगर पालिका परिषद चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों में कमर कसनी शुरू कर दीं हैं कांग्रेस में बैठक कर चुनाव की रणनीति पर चर्चा की, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक मैं संगठन के पुराने कार्यकर्ता को चुनाव लड़ने पर भी जोर दिया गया, तथा कांग्रेस में भी पुराने और नए का समीकरण जोर पकड़ता जा रहा है या यूं कहें की योगेश राणा की दावेदारी पर प्रश्न लगाया जा रहा है ?कांग्रेस की कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब योगेश राणा कांग्रेस में नहीं है तो दावेदारी कैसी ? इस तरह से कांग्रेस भी दो गुटों में नजर आ रहा हैं l
उधर कांग्रेस से विधानसभा चुनाव लड़ चुके पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ,योगेश राणा के पक्ष में नजर आ रहे हैं जिस कारण से सामान्य सीट पर लगभग संभावित प्रत्याशी हो जा सकते हैं ? ,जबकि महिला सीट पर अभी तीन नाम कांग्रेस में उभर कर आए हैं
यही हाल बीजेपी का है वहां भी पुरानी भाजपा और नई भाजपा की लड़ाई के अलावा पुरानी भाजपा वाले अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है जबकि नए भाजपा वाले एक दूसरे की टांग खींच रहे हैं जो कि सोशल मीडिया के माध्यम से सब लोग देख रहे हैं जिससे स्पष्ट होता है कि भाजपा में भी अंदरूनी लड़ाई चरम पर है यदि विधानसभा के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो भाजपा को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा और यदि यही आंकड़े नगर पालिका चुनाव में तब्दील होते हैं तो निश्चय ही भाजपा के लिए खतरे की घंटी है
इन दोनों पार्टियों की आपसी खींच तान का सीधा फायदा निर्दलीय प्रत्याशी उठा सकता है और भाजपा में जो दो नाम सामान्य और महिला सीट पर अभी तक उबर कर आए हैं वह भी नए खिलाड़ी है अब देखना है पिछले चुनाव की तरह भाजपा में फिर से दो फाड़ होने की स्थिति ना आए या भीतरघात का खतरा नजर आता है
इतना तो निश्चित है कांग्रेस बीजेपी दोनों में ही अंदरूनी खींचतान का फायदा आने वाले चुनाव में निर्दलीय उठा सकता है जो इन दोनों दलों मे सेथ मारी कर सके उसकी जीत सुनिश्चित है
